अनकही-अनसुनी लखनऊः सआदत अली खान के मकबरे की खासियत

अनकही-अनसुनी लखनऊः सआदत अली खान के मकबरे की खासियत

चंद खास मकबरों में से एक है सआदत अली खान के मकबरे इस इमारत की कारीगरी बड़े इमामबाड़े से भी बेहतरीन है इसके पूर्व में उनकी बेगम खुर्शीद ज़दी का भी मकबरा है ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः मशहूर है लखनऊ का गड़बड़झाला बाजार

अनकही-अनसुनीः मशहूर है लखनऊ का गड़बड़झाला बाजार

गड़बड़झाला बाज़ारः खरीदारी का मोहक क्षण चूड़ियों की खनखनाहट गुलजार गड़बड़झाला बाजार अमीनाबाद के तंग गलियों में है गड़बड़झाला बाजार ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः 1820 में लखनऊ में बनी थी पहली शेरवानी

अनकही-अनसुनीः 1820 में लखनऊ में बनी थी पहली शेरवानी

1820 में लखनऊ में बनी थी पहली शेरवानी अचकन 2200 साल से है हिंदुस्तान की पौशाक  अचकन को जवाहरलाल नेहरु ने दी नई पहचान ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः चौक का शहजादा जिसने लखनऊ को उसकी ठेठ जुबान दी 

अनकही-अनसुनीः चौक का शहजादा जिसने लखनऊ को उसकी ठेठ जुबान दी 

चौक के शहजादे थे अमृतलाल नागर अमृतलाल नागर ने दी लखनऊ को ठेठ जुबान उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः जब लखनऊ में एक पल में बदल गया था सब कुछ

अनकही-अनसुनीः जब लखनऊ में एक पल में बदल गया था सब कुछ

ऐसा क्या हुआ कि झटके से बदल गई नारायण दत्त तिवारी की जिंदगी राजीव गांधी को क्यों आया इतना गुस्सा कि खुद जहाज उड़ा कर चले गए राजीव गांधी की मौत, नारायण दत्त तिवारी की दावेदा... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः नाजुक लखनऊ के करारे पान

अनकही-अनसुनीः नाजुक लखनऊ के करारे पान

लखनवी पानदानी तहज़ीब बनारसी रवायत से है अलग लखनवी तहज़ीब का अहम हिस्सा है पान नाजुक लखनऊ के पलंग तोड़ पान ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः ‘बाग’ से चारबाग रेलवे स्टेशन बनने की कहानी

अनकही-अनसुनीः ‘बाग’ से चारबाग रेलवे स्टेशन बनने की कहानी

चारबाग में ही हुई थी नेहरु-गांधी की पहली मुलाकात देश का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है चारबाग   चारबाग 1916 तक वास्तव में एक ‘बाग’ था   ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः लखनऊ की छतर मंजिल की अनूठी कहानी

अनकही-अनसुनीः लखनऊ की छतर मंजिल की अनूठी कहानी

अनूठी, ऐतिहासिक इमारत है छतर मंजिल इसकी ख़ासियत उस के ऊपर बनी छत्तरी से है पहले दो छत्तर मंजिल हुआ करती थी ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः ‘आम’ को खास बनाने की पहल लखनऊ से हुई थी

अनकही-अनसुनीः ‘आम’ को खास बनाने की पहल लखनऊ से हुई थी

यही से शुरू हुआ छात्रों को आम से खास बनाने का सिलसिला अतुल अंजान और रविदास मल्होत्रा का यही से हुआ उदय आम छात्र को ताकत दो का आंदोलन चला ... ...(विस्तार से पढ़ें)


अनकही-अनसुनीः नवाबी शहर लखनऊ की नज़ाकत और नफासत की कहानी

अनकही-अनसुनीः नवाबी शहर लखनऊ की नज़ाकत और नफासत की कहानी

तहज़ीब कोई मेरी आँखों में जंचेगी क्या मेरी निगाह ए शौक़ ने देखा है लखनऊ  कभी पाक के लोग भी थे लखनवी ज़ुबान के दीवाने ... ...(विस्तार से पढ़ें)


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