लावारिस गायों को आश्रय देने वाली संस्था `हनुमंत जीव धाम` के अध्यक्ष से खास बातचीत

  • Aditi
  • Sunday | 25th June, 2017
  • local
संक्षेप:

  • लावारिस गायों के संऱक्षण का काम करती है ये संस्था
  • बूचड़खाना बंद करना गौ-संरक्षण के लिए नहीं है कारगर उपाय
  • सुंदरकांड से मिले पैसों से की जाती है गौ-संवर्धन

उन्नाव में लावारिस पशु अगर घायल अवस्था में कहीं भी हनुमंत जीव धाम के कार्यकर्ताओं को दिख जाते हैं तो वो उसे अपने हनुमंत जीव धाम पर लाकर उसकी सेवा करके उसका जीवन बचाने का काम करते हैं।

इस काम में संस्था को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन संस्था के अध्यक्ष अखिलेश अवस्थी इस काम को बखूबी करते है। न्यूज़ से खास बातचीत-

NYOOOZ- अपने और संस्था के बारे में बताइए?

अखिलेश अवस्थी- अखिलेश अवस्थी नाम है हमारा, गाय हमारी सांस्कृतिक विरासत है। हालात सिर्फ स्वार्थों साधने भर कर रह गया है। गांवों में गाय और गौवंश को छोड़ दिया जाता है, शहर में गाय को दूध लेने के बाद रोड पर छोड़ दिया जाता है। जिसके बाद हमने गायों और पशुओं के संरक्षण देने के लिए हनुमंत जीव धाम का संगठन किया।

NYOOOZ- इस कार्य को करने में आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

अखिलेश अवस्थी- आर्थिक समस्या के साथ ही साथ बहुत कम लोग गो संरक्षण और गो संवर्धन के लिए आगे आते है।

NYOOOZ- योगी सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?

अखिलेश अवस्थी- योगी सरकार ने जो बूचड़खानों को बंद करने का फैसला लिया है। वो सराहनीय है मगर गो संरक्षण और गो संवर्धन के लिए ये कोई कारगर उपाय नहीं है। इसके लिए योगी सरकार को किसान पेंशन योजना लागू करनी चाहिए अक्सर ऐसा होता है कि गाय के बछड़े को अनुपयोगी समझकर लोग नदी के किनारों पर ले जाकर छोड़ देते है। अगर बैल से खेती करने वाले किसानों के लिए कुछ अधिक पेंशन की व्यवस्था की जाती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लोग बैलों को भी पालना शुरू कर देंगे।

NYOOOZ- NYOOOZ के माध्यम से आप क्या अपील करना चाहते हैं?

अखिलेश अवस्थी- गाय के संरक्षण के लिए केवल रास्ते पर चल रही गायों का पैर छू लेने से कुछ नहीं होने वाला है। इसके लिए बहुत ही गंभीरता दिखाने से काम चलेगा।

 

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