सिटी स्टारः मिलिए राजधानी की CA टॉपर अन्विता गुप्ता से

  • Sonu
  • Saturday | 20th January, 2018
  • local
संक्षेप:

  • घर में रहा पढ़ाई का माहौल
  • छोड़ दिया था पार्टी में जाना
  • बचपन से नहीं था यह सपना

लखनऊ: बेटियों ने समय-समय पर देश का मान बढ़ाया है यह कोई नयी बात नहीं है. देश की जांबाज बेटी सुनीता विलियम और किरण बेदी की तर्ज पर ही लखनऊ की अन्विता गुप्ता ने लखनऊ का नाम रोशन किया. आपको बता दें कि हाल ही में ‘द इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टेड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया’ द्वारा चार्टेड अकाउंटेंट यानी सीए फाइनल का परिणाम घोषित किया गया था जिसमें लखनऊ की अन्विता ने अच्छे अंक ग्रहण किये और अपना और प्रदेश का नाम रोशन किया. राजधानी के गोमती नगर में रहने वाली अन्विता ने सीए फाइनल में 800 में से 477 अंक हासिल किये. इनके पिता धर्मेन्द्र गुप्ता भी सीए हैं. NYOOOZ ने अन्विता से उनके बेहतर कार्य और शिक्षा जगत से जुड़े अन्य मुद्दों पर ख़ास बातचीत की. पेश हैं बातचीत के कुछ अंशः

NYOOOZ: क्या आपको बचपन से ही था कि मुझे भी पापा की तरह सीए बनना है?

अन्विता: बचपन से तो मेरा बिलकुल भी कोई ऐसा प्रयास नहीं था कि मुझे सीए ही बनना है. लेकिन क्लास 10 करने के बाद मुझे साइंस फील्ड में कोई इंटरेस्ट नहीं था इसलिए सोचा कि चलो कॉमर्स लिया जाए. फिर कॉमर्स पढ़ते-पढ़ते इन्ट्रेस्ट आया तो सोचा कि कॉमर्स के क्षेत्र में ही कुछ किया जाए. फिर सीए से बेहतर आप्शन कोई होता नहीं है मेरे अनुमान से कॉमर्स साइड में, इसलिए तैयारी की और उसका परिणाम अच्छा मिला.

NYOOOZ: आपकी पढ़ाई का रूटीन क्या रहता था, जरा बताएं?

अन्विता: आम तौर पर हर दिन पढ़ाई का रूटीन अलग अलग रहता था. लेकिन जब एग्जाम का लास्ट टाइम आता था उस समय करीब 6–7 घंटे रोज पढ़ाई करती थी. सीए का जो लास्ट एग्जाम था उसमें मैंने दो महीने तक रोज छह से सात घंटे पढ़ाई की थी. मेरे अनुसार पढ़ाई क्वांटिटी नहीं बल्कि क्वालिटी की होनी चाहिये.

NYOOOZ:  क्या कोई ऐसी बात जिसे आप एग्जामिनेशन के तौर पर हमेशा याद रखेंगी?

अन्विता: बिलकुल, मेरा एक डायरेक्ट टैक्स का एग्जाम था यह फाइनल सीए एग्जाम का ही एक पार्ट था. जिस दिन यह एग्जाम था उस दिन मेरी तबियत खराब थी लगता था कि कोई समस्या न आजाये लेकिन मैंने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ एग्जाम दिया और एग्जाम अच्छा हुआ.

NYOOOZ:  आपको पेरेंट्स की तरफ से किस तरह की सहायता मिली कैसा सपोर्ट मिला, जरा बताएं?

अन्विता: पेरेंट्स ने शुरू से लेकर आखरी तक हमेशा पूरा सपोर्ट किया. एग्जाम के समय पूरे घर में पढ़ाई का माहौल रहता था मेरी माँ ने मेरी पढ़ाई के चलते सभी जगह आना जाना छोड़ दिया था, क्योंकि उनका ऐसा मानना था कि इससे पढ़ाई में वाधा आती है.

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