सिटी स्टार – रेसलर शीतल तोमर ने जीते 26 से ज्यादा पदक

  • Pinki
  • Saturday | 25th November, 2017
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संक्षेप:

  • शीतल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
  • 24 साल की महिला पहलवान शीतल ने तुर्किस्तान में मेडल जीता
  • राजस्थान सरकार ने किया सम्मानित, बनी प्लाटून कमांडर

मेरठ - 24 साल रेसलर शीतल तोमर 18 से ज्यादा नेशनल और आठ से ज्यादा इंटरनेशनल पदक जीत चुकी हैं। इस महिला ने यूपी में मेरठ का नाम रोशन किया है, जिसकी चमक राजस्थान तक पहुंची है। कुश्ती में उंदा प्रदर्शन करने पर शीतल को भारत केसरी और महिला चंबल केसरी का खिताब मिल चुका है। अब राजस्थान सरकार ने अपने यहां प्लाटून कमांडर नियुक्त किया है। दरअसल, मेरठ जिले के पचगांव की रहने वाली शीतल ने जब गांव से निकलकर कुश्ती करने के बारे में सोचा तो लोगों ने तरह-तरह की बातें की, एक लड़की कुश्ती लडेगी, इतने छोटे कद की लड़की मैदान में कैसे पटखनी दे पाएगी।

शीतल ने लोगों की बातों की परवाह किए बिना अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुश्ती हाल में जबर सिंह सोम की देखरेख में कुश्ती लड़ना शुरू किया। कुश्ती की स्पर्धाओं में उतरने के साथ ही नोएडा कॉलेज आफ फिजिकल एजुकेशन से बीपीएड किया है। पढ़ाई के साथ चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुश्ती हाल में पिछले आठ साल से पसीने बहाने वाली शीतल के खाते में अनगिनत उपलिब्धयां है। अभी हाल ही में शीतल ने सीनियर एशियन इंडोर मॉर्शल आटर्स टूर्नामेंट में कजाकिस्तान सहित कई पहलवानों को हराकर ब्रॉज मेडल अपने नाम किया है।

गीता फोगाट की बहन को हराया

दंगल फिल्म से चर्चा में आई गीता फोगाट की बहन रीतू फोगाट को सबसे पहले शीतल तोमर ने कुश्ती के मैदान में पटखनी देकर विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में पहुंची।

नेशनल में 18 पदक, पांच बार आल इंडिया यूनिवर्सिटी में पदक

शीतल तोमर ने कुश्ती में साल 2009 में प्रवेश किया था और उसी साल सब जूनियर नेशनल कुश्ती चैम्पियनशिप में ब्रांज मेडल लेकर जीत का सिलसिला शुरू कर दिया। फिर एक-एक करके आल इंडियां इंटर यूनिवर्सिटी रेसलिंग चैंपियनशिप, जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप, सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप, भारत केसरी भारत कुमारी रेसलिंग चैंपियनशिप सहित कई नेशनल स्पर्धाओं मे पदक जीता।

हार के बाद भी हार नहीं मानी

शीतल तोमर ने जिस साल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुश्ती हाल में कुश्ती का ककहरा सीखना शुरू किया, उसी साल के आखिर में अपना पहला सब जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। पहले साल इंटरनेशनल में उसे पदक नहीं मिला, लेकिन उन्होने हार नहीं मानी और जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में थाईलैंड में जाकर ब्रांज मेडल अपने नाम किया। बुलगारियां में आयोजित जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में शीतल ने पांचवा स्थान हासिल किया था और अभी

हाल ही में तुर्कीस्तान में सीनियर एशियन इंडोर मार्शल आर्ट गेम्स में ब्रॉज जीतकर विश्वविद्यालय सहित पूरे मेरठ और यूपी का नाम रोशन किया। पिता का साया उठने के बाद भी हौंसला नहीं छोड़ा। शीतल के कोच जबर सिंह बताते हैं कि शीतल के पिता ने कुश्ती सीखने के लिए उन्हें विश्वविद्यालय में ही छोड़ दिया था। आज वह इस दुनिया में नहीं हैं, बाप का साया न होने के बाद भी शीतल ने अपने हौसले को नहीं छोड़ा, शुरू में लोगों के ताने से जूझते हुए उसने अपनी लड़ाई को जारी रखा और एक-एक करके पदक अपने नाम करते हुए उसने सभी की जुबान बंद कर दी।

दौड़ में सबसे आगे

शीतल तोमर ने ना केवल कुश्ती के मैदान में कई नेशनल और इंटरनेशनल मेडल अपने नाम किए हैं बल्कि वो रेस में पुरूष धावकों को भी पीछे छोड़ देती हैं। शीतल के पदकों और उसके प्रदर्शन को देखते हुए राजस्थान सरकार ने अभी अपने यंहा उन्हें प्लाटून कंमाडर नियुक्त किया है।

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