मेरठ के 'शार्दूल' जीत चुके हैं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 4 गोल्ड

  • Abhijit
  • Saturday | 9th December, 2017
  • politics
संक्षेप:

  • शहर के सिटी स्टार में इस बार नेशनल शूटर `शार्दूल विहान`
  • दिल्ली में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में जीते 4 गोल्ड
  • शूटिंग में कई दिग्गजों को छोड़ चुके हैं पीछे

मेरठ- हाल ही में दिल्ली में हुई 61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में 14 साल के शार्दूल विहान ने शानदार प्रदर्शन कर चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए है। शूटर ने जूनियर और सीनियर दोनों वर्गो में हिस्सा लेकर न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि वर्ल्ड नंबर वन अंकुर मित्तल, कॉमनवेल्थ के पदक विजेता मोहम्मद असब, हाल ही में वर्ल्ड कप फाइनल में रजत पदक जीतने वाले संग्राम दहिया और उभरते सितारे शपथ भारद्वाज को शार्दूल ने पीछे छोड़ दिया है। शार्दूल ने नेशनल शूर्टर बनने का गौरव हासिल किया है। अब शार्दूल की नजर कॉमनवेल्थ गेम्स पर है।

शार्दूल मोदीपुरम के शिवाया गांव का रहने वाला है और डीएमए प्रथम में कक्षा 9वीं का छात्र है। दिल्ली के कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में हुई 61वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में इस नन्हे शूटर ने सीनियर वर्ग और जूनियर वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर सभी शूटर्स को चौका दिया। सीनियर डबल टैप के फाइनल में इस साल दो वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने वाले हरियाणा के अंकुर मित्तल को 78-76 से पराजित किया। कोच अजुर्न अवार्डी अनवर सुल्तान ने बताया कि शार्दूल कमाल कर रहा है। सीनियर की टीम में भी शार्दूल ने गोल्ड हासिल किया है। एक ही चैंपियनशिप में चार गोल्ड मेडल झटकर शार्दूल ने इतिहास रचा है। सीनियर की टीम में भी शार्दूल ने गोल्ड पर निशाना साथा है।

अब कॉमनवेल्थ पर नजर
कोच अनवर सुल्तान के निर्देशन में शार्दूल शूटिंग के गुर सीख रहा है। शार्दूल का कहना है कि अब तो महज शुरूआत हो। अभी तो मुझे बहुत दूर तक जाना है और मेरे लिए सबसे बड़ा वो पल होगा जब मैं देश के लिए ओलंपिक में मेडल लाउगा। फिलहाल मेरी नजर कॉमनवेल्थ गेम्स पर है, जिसकी में तैयारी कर रहा हूं।

ये हैं उपलब्धियां
-नॉर्दन इंडिया डबल टैप शूटिंग चैपिंयनशिप 2012 दिल्ली में सिल्वर मेडल
-यूपी स्टेट जूनियर व सीनियर शूटिंग चैपिंयनशिप 2014 में सिल्वर
-यूपी स्टेट सीनियर शूटिंग चैपिंयनशिप में गोल्ड
-जीवी मावलंकर पटियाला 2014 में शूटिंग चैपिंयनशिप में जूनियर व सीनियर में ब्रांज मेडल
-फिनलैंड में इंडिया की ओर से थर्ड रैंक थी, जिसमें 6 खिलाड़ी खेल रहे थे। वर्ल्ड में 9 वीं रैंक
-इटली में शूटिंग वर्ल्ड कप में इंडिया की ओर से प्रथम स्कोरर और वर्ल्ड में 10 वीं रैंक
-नवंबर 2015 नॉर्थ जोन इंडिया में सीनियर और जूनियर में गोल्ड मेडल जीता
-जयपुर में हुई 60वीं नेशनल शूटिंग चैपिंयनशिप में जूनियर में गोल्ड मेडल व सीनियर में सिल्वर मेडल झटका

शार्दूल के जीत की तरफ बढ़ते कदमों से घर का हर सदस्य खुश है। परिवार में दादा ओमपाल सिंह, दादी संतोष देवी, पिता दीपक विहान, मां मंजू विहान, बहन खुशबू चौधरी, चाचा मनोज विहान और उनका परिवार है। इसके साथ ही शार्दुल को स्कूल में भी खूब प्यार मिलता है। अपने दोस्तो के बीच शार्दुल सेलिब्रीटी की तरह फैमस हैं।

इसलिए 7 साल की उम्र में शार्दूल ने उठाई थी राइफल
शूटर शार्दूल के पिता दीपक विहान बताते हैं, शार्दूल को क्रिकेट खेलना अच्छा लगता था। उसके शौक को देखते हुए जब वो 6 साल का था, तब मैंने उसे विक्टोरिया पार्क में किक्रेट सीखने के लिए भेजना शुरू किया। एक साल की प्रैक्टिस के बाद एक शार्दूल बोला कि पापा मुझे सबसे पीछे फील्डिंग के लिए खड़ा करते हैं। बैटिंग-बॉलिंग में भी मेरा नंबर लास्ट रखा जाता है। उसकी यह बात सुनकर मैंने उसे क्रिकेट से हटाकर बैडमिंटन कोच के पास भेजना शुरू कर दिया। हमारा घर स्टेडियम से थोड़ा दूर गांव में है। एक दिन शार्दूल बैडमिंटन प्रैक्टिस के लिए लेट हो गया तो उसके कोच ने उसे घर भेज दिया। अगले दिन मैं जाकर कोच से मिला तो उन्होंने सजेस्ट किया कि इसके लिए बैडमिंटन सही नहीं है, किसी और स्पोर्ट में भेजिए। शार्दूल 7 साल के थे जब उनके पिता उन्हें राइफल एसोसिएशन के कोच वेदपाल सिंह से मिलवाने ले गए। दीपक बताते हैं, इसकी उम्र देखकर वे बोले- अभी बहुत छोटा है, थोड़ा इंतजार करना सही रहेगा। शार्दूल वेट की वजह से उम्र से थोड़ा ज्यादा लगता था। वेदपाल जी ने उसे राइफल उठाकर निशाना लगाने के लिए कहा। इसने बड़े आराम से राइफल उठाई और टारगेट की ओर तान दी। यह देखकर कोच भी सिखाने के लिए राजी हो गए।

सुबह 4 बजे उठकर करते हैं प्रैक्टिस
शार्दूल मेरठ में रहते हैं। सुबह चार बजे उठकर प्रैक्टिस के लिए दिल्ली जाते हैं। रोज करीब 150 किलोमीटर का सफर करते हैं। प्रैक्टिस से लौटकर स्कूल जाते हैं। हालांकि, कई बार देर होने या किसी इवेंट में हिस्सा लेने के कारण स्कूल नहीं भी जाते हैं। कड़ी मेहनत करने वाले शार्दूल अपनी कामयाबी का श्रेय पिता और चाचा को देते हैं। वेदपाल से चार साल कोचिंग लेने के बाद शार्दूल दिल्ली में कोचिंग लेने लगे। अभी उन्हें अर्जुन अवॉर्डी अनवर सुल्तान कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में कोचिंग देते हैं।

शार्दूल को सोमवार छोड़ रोज दिल्ली जाना होता है। घर पर भी वो अपनी गन की मूवमेंटस पर फोकस करता रहता है। दीपक कहते हैं, मैं व्यस्तता के कारण रोज दिल्ली नहीं जा सकता। इसलिए शार्दूल अपने चाचा मनोज के साथ रोज 4 बजे दिल्ली जाता है। वह रोज स्कूल नहीं जा पाता। इसलिए उसकी पढ़ाई के लिए ट्विटर रखा है। टीचर भी होमवर्क के लिए दबाव नहीं बनाते।

Related Articles