फोटोग्राफर प्रमेश साध से NYOOOZ की खास बातचीत, फोटोग्राफी के महत्व को कुछ इस तरह समझाया

  • Hasnain
  • Monday | 25th June, 2018
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संक्षेप:

  • NYOOOZ ने की फोटोग्राफर प्रमेश साध से खास बातचीत
  • फोटोग्राफी पर की खुलकर बात
  • इलाहाबाद के युवाओं को दिया ये संदेश

इलाहाबाद: छोटे शहरों में प्रतिभा की कमी नहीं होती है और ऐसे ही एक शहर से निकले हैं प्रमेश साध। पेशे से फोटोग्राफर प्रमेश साध कई कॉन्टेस्ट्स में विनर रह चुके हैं और फोटोग्राफी में महारत हासिल हैं।

52 वर्षीय प्रमेश साध का जन्म मिर्जापुर में हुआ लेकिन बाद में उनका परिवार इलाहाबाद में बस गया और यहीं के होकर रह गए। प्रमेश ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है। फोटोग्राफी प्रमेश का शौक और जुनून है, उनके परिवार की बात करें तो माता,पिता, पत्नी के अलावा एक बेटा है जो वकील है जबकि बेटी पढ़ाई कर रही है। इसके साथ-साथ प्रमेश का खुद का रिटेल स्टोर भी है।

NYOOOZ ने प्रमेश साध से बात की और उनसे तथा फोटोग्राफी से जुड़े कई सवाल किए। आप भी पढ़िए उन्होंने क्या-क्या कहा

NYOOOZ: आज के फोटोग्राफी के ट्रेंड के बारे में आप क्या कहेंगे जहां DSLR होने वाला हर व्यक्ति फोटोग्राफर है।

प्रमेश साध: फोटोग्राफी .......छायाचित्र, छायांकन साधारण समझ में ये एक तरीका है यादों को संजोने का। पर इसे जुनून की हद लेने वाले जानते है कि फोटोग्राफी एक कला है जीवित को मूर्त रूप में जीवित करने की कला। लोगों के पास कैमरे होते है ,आंखें होती है और वो छायांकन भी करते हैं पर हर छायांकन ,छायांकन नही होता क्योंकि हर छवि , कला की दृष्टि से देख कर नहीं ली जाती और इसी समझ को फोटोग्राफी कहते हैं।

मेरे हिसाब से हर इंसान को ये समझ होती भी नहीं है और ये समझ कोई कॉलेज या कोर्स आपको दे भी नहीं सकता। किस एंगल से क्लिक कितना प्रभावी होगा? प्रकाश स्रोत किस दिशा से अधिक प्रभावी हो, ऐसे बहुत से बिंदु हैं जो फोटोग्राफी को आर्टिस्टिक बनाते हैं। पर इन बिंदुओं की समझ ईश्वर से मिला गुण होता है जो हर कोई नहीं समझ पाता है। आज कल के DSLR कैमरे के ज़माने में महंगे कैमरे को अच्छी फोटोग्राफी की सबसे पहली आवश्यकता माना जाता है लेकिन मैं नहीं मानता इस बात को। फोटोग्राफी एक कला है जो बिना बहुत महंगे तकनीकी यंत्रों के भी दिखाई जा सकती है।

केविन कार्टर साउथ अफ्रीकन जॉर्नलिस्ट ने एक फोटो ली थी जिसमें ये था कि एक गिद्ध एक भूख से पीड़ित कमजोर लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा है ताकि वो उसको खा सके। केल्विन ने कुछ महसूस किया और इस दृश्य को फ़ोटो बनाया। अपने संदेश या फोटोग्राफर के एंगल को उस चित्र ने ऐसे प्रदर्शित किया कि सबसे विवादास्पद चित्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ और केल्विन अपराध बोध ग्रस्त हो गए। वहां कहीं ये प्रश्न नहीं आया कि केल्विन ने कौन सा कैमरा लिया था , कितने पिक्सल का था कैमरा,फिल्टर यूज़ किया कि न बस बिंदु। यही था कि उस क्षण में केल्विन रोचकता ढूंढी भले ही नकारात्मक।

फोटोग्राफर स्टीव मसीक्यूरी ने 1984 में एक 13 वर्षीय अफगान रिफ्यूजी लड़की की आंखों की फ़ोटो ली जिसे जून 1985 में नेशनल जियोग्राफिक की बुक के कवर पेज में लिया। ये रहस्यमयी आंखों वाली लड़की फ़ोटो चर्चा का विषय बन गयी। सब जानना चाहते थे इस लड़की को जिस पर से पर्दा 17 साल बाद खुला। पर विषय ये नहीं बना की स्टीव ने कौन सा कैमरा यूज़ किया ? विषय ये रहा कि फोटोग्राफर ने किस एंगल से इस खूबसूरती को कलात्मकता दी। फोटोग्राफी आज एक शौक की तरह जरूर बढ़ रही है आज पर इसमें भी रचनात्मकता और कलात्मकता की जगह एक बाज़ारवाद है जिसके पीछे उद्देश्य थोथा की या तो कृतिम सुंदरता को लाना और पैसा कमाना। जिन्होंने इस ट्रेंड में अपने शौक को रखा वो जानते हैं कि ये आज भी कितना महंगा शौक है पर जिन्होंने इसे कृत्रिमसौंदर्य में रख लिया वो जानते कि बिना कलात्मकता के भी ये ट्रेंड कितना फलता-फूलता है।

केविन कार्टर

NYOOOZ: आपके कॉलेज के समय में फोटोग्राफी का क्या महत्व था?

प्रमेश साध: मेरे कॉलेज के दिनों में फोटोग्राफी ब्लैक एंड वाइट से निकल रंगों से जुड़ रही थी हालांकि ये फोटोग्राफी के लिए स्वर्णिम परिवर्तन था पर फिर भी गहरी कला श्वेत और श्याम में थी । फोटोग्राफी में रील में चित्रों की संख्या अधिक हो गयी थी , रंगीन चित्र ने सजीवता अधिक कर दी तो जाहिर है युवाओं में रंगीन फ़ोटो में खुद को देखने का एक फैशन से आ गया ।उस दौर में फोटोग्राफी का महत्त्व था पर कलात्मक अभिरुचि नहीं ।फैशन के लिए भी एक महत्वपूर्ण समय था मेरे कॉलेज के दिन इसलिए फोटोग्राफी का महत्व भी फैशन से प्रेरित था । फैशन और कला का साथ होता भी और नही भी पर छायांकन और फ़ैशन तो एक दूसरे के पूरक हो चुके है।

NYOOOZ: आपके आइडियल कौन है?

प्रमेश साध: विक्रम बावा और प्रवीण भट्ट मेरे पसन्दीदा दो भारतीय मूल के फोटोग्राफर। दोनों ही मूलतः फैशन फोटोग्राफर है ।विक्रम बावा की फोटोग्राफी की तारीफ एक उदाहरण के साथ करता हूँ। कुछ सालों पहले एक प्रशिधि व्यवसायी की पत्नी ने अनमोल पेंटिंग्स का फोटोशूट विक्रम बावा से करने को कहा। विक्रम का तो ये व्यवसाय है पर इसके पीछे की वजह विक्रम न समझे। विक्रम इतने साफ फोटोग्राफर हैं कि उनके फोटोज उन कलाकृतियों की फोटोज नही प्रतिरूप के रूप में करने के लिए उन्हें यह कार्य सौंपा गया। ये एक तरह से विक्रम के कार्य की गहनता को दिखाता है इसलिए वो आदर्श हैं।

NYOOOZ: इलाहाबाद में आपके अनुसार 3 अच्छी और 3 बुरी बातें क्या हैं?

प्रमेश साध: जगह ,स्थल गुण के साथ ही होते हैं उसको निर्गुणी तो वहां रहने वाले बनाते हैं। इलाहाबाद की तीन खासियत है ....संगम .....इलाहाबाद विश्वविद्यालय .....और इलाहाबाद का इलाहाबाद होना जिसके दिल में कोई कहीं से आये सब समा जाते हैं। इलाहाबाद की तीन कमियों की पायदान पर सिर्फ एक ही दुर्गुण है वो है यहां के लोग, जो इसकी गरिमा को सिर्फ शब्दों में व्यक्त करते तो वहीं दूसरी ओर अपने कार्यों द्वारा इसकी  गरिमा को धूमिल करते हैं।

NYOOOZ: इलाहाबाद के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल बने।

प्रमेश साध: इलाहाबाद क्या ये संदेश देश के हर युवा ,हर व्यक्ति के लिए ....हर व्यक्ति एक ओज एक आग के साथ जन्म लिया है। मतलब हर व्यक्ति का जीवन किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही हुआ है तो अपने जीवन के इस उद्देश्य को स्वयं खोजें और सार्थक जीवन जिये साथ ही औरों को भी प्रेरित करें सार्थक जीवन के लिए।

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