Alaya Design Studio शुरू करने वाली रिचा घनसियाल से NYOOOZ की खास बातचीत

  • Hasnain
  • Saturday | 3rd February, 2018
  • local
संक्षेप:

  • रिचा घनसियाल ने की Alaya Design Studio की शुरुआत
  • यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स यूके से लिया मास्टर्स की डिग्री
  • NYOOOZ ने की खास बातचीत

 

देहरादून: देहरादून में Alaya Design Studio की शुरुआत करने वाली रिचा घनसियाल ने NYOOOZ से खास बातचीत में अपने सफर के बारे में बताने के साथ-साथ लघु उद्योग की स्थिति पर भी टिप्पणी दी।

NYOOOZ: आप अपने बारे में हमारे पाठकों को कुछ बताएं?

रिचा घनसियाल: मैं और मेरे पति दोनों ही डिजाइन से ताल्लुकरखते हैं। मैंने अपनी ग्रेजुएशन राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी)  अहमदाबाद से किया है और मेरे पति ने Kendall College of Art and Design, Michigan, America से किया है। हम दोनों ही उत्तराखंड से जुड़े है , क्योंकि मैं गढ़वाल से ही हूं और मेरे पति वैसे तो लद्दाख से हैं लेकिन 40 साल से उत्तराखंड में रह रहे हैं।

NYOOOZ: आपने अपने सफर की शरुआत कैसे की?

रिचा घनसियाल: डिजाइन में काम करने के बाद और अलग-अलग जगहों को पढ़ने के बाद हमने सतत विकास को चुना और उत्तराखंड वापस आने की वजह ही थी कि हमे अपनी ही समाज में काम करना था। साथ ही मैंने अपनी मास्टर्स की डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स यूके से रूरल डेवलपमेंट में किया है, इसी कारण मेरा रूझान ग्रामीण विकास की ओर है। 2006 में हम दोनों ही उत्तराखंड आएं और हमने क्राफ्ट, कंसल्टेंसी और फर्नीचर के बारे में पढ़ा। आज के समय मे जो काम हम करते हैं उसका सीधा जुड़ाव स्थानीय साधनों से  है, क्योंकि सतत विकास ही हमारा दृष्टिकोण रहा है।

NYOOOZ: अापने इस फील्ड को ही क्यों चुना?

रिचा घनसियाल: अगर में अपनी बात करूं तो अकादमी में डिजाइन ट्रेनिंग के दौरान शिल्प समुदायों के साथ मुझे काफी काम करने को मिला। मैंने उत्तरी पूर्वी इलाके में भी काफी काम किया और साथ ही में मुझे उत्तराखंड में ग्रामीण इलाकों में काम करने का मौका मिला। मैंने दो साल की क्राफ्ट लाइवलीहुड ट्रेनिंग भी करी है। उत्तरी पूर्वी इलाकों में काम करने के साथ मुझे आगे क्या करना था वो समझ मे आया। मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा में रहते हुए मैंने बांस और मेटल फाइबर के बारे में काफी कुछ सीखा। यहां आने का मकसद इसलिए था क्योंकि हम अपनी जड़ों से ही जुड़ना चाहते थे। वैसे तो हम उत्पादन के मामले में काफी छोटे हैं लेकिन हमारा काम बोलता है। अब तक हम और हमारे प्रोडक्ट्स काफी डिज़ाइन पत्रिकाओं में आ चुके हैं।

NYOOOZ: बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन के बारे में आप क्या कहेंगी?

रिचा घनसियाल: मुझे नहीं लगता की मुझ पर बाजार का प्रभाव पड़ता है क्योंकि हमारा उत्पादन का आयतन उस स्तर का नहीं है। भारत में कुछ कंपनियां हैं जो काफी सारे शिल्पकारों से जुड़ी हुई हैं जिनका उतपादन भी काफी है जिससे वह बाजार की जरूरतों को पूरा कर सके। बात अगर विदेशी कंपनियों  की हो तो ये प्रभाव सिर्फ इन्ही भारतीय कंपनियों में पड़ेगा जो कि मुख्य धारा में हैं।

NYOOOZ: सरकार की तरफ से कितना समर्थन मिला है?

रिचा घनसियाल: सरकार जमीनी स्तर के काम को लेकर काफी कम जागरूक है। जिस तरह से सरकार बाजार को विश्व कंपनियों के लिए खोल रही है ताकि निवेश आ सके। उसी प्रकार से सरकार अगर लघु उद्योग जैसे कि हस्तशिल्प या फिर हथकरघा के काम को सिर्फ ग्रामीण तक सीमित न करके बल्कि व्यापार और स्किल के साथ जोड़ेगी तो काफी फायदा होगा। दूसरी बात यह है की हमारे यहां शिल्पकारी को ग्रामीण के दर्जे में रखा जाता है। अगर हम विश्व मे देखें तो शिल्पकारी को काफी प्रोत्साहित किया जाता है। लेकिन भारत में ये सोच बिल्कुल अलग है। यहां इस उद्योग को ग्रामीण शब्द से जोड़ कर इसे काफी मामूली समझ लिया जाता है। हमें इसी शब्दावली को बदलने की जरूरत है।

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