IIT एंट्रेंस एग्जाम हो सकता है आसान, मोदी सरकार जल्द लेगी फैसला

  • इस बार के नतीजों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
  • इस साल करीब 1 हजार सीटें खाली रह गई
  • जिसके कारण कटऑफ में गिरावट करनी पड़ी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में दाखिले के लिए होनेवाले जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई-अडवांस) को केंद्र सरकार आनेवाले दिनों में थोड़ा आसान करवा सकती है। इसकी वजह इसबार के नतीजे हैं। दरअसल, इस साल करीब 1 हजार सीटें खाली रह गई थीं, जिन्हें भरने के लिए बाद में कटऑफ में गिरावट करनी पड़ी थी।

एचआरडी मिनिस्ट्री में सचिव (उच्च शिक्षा) आर सुब्रमण्यम ने बताया, `इस साल आए परिणामों को देखते हुए हम आईआईटी काउंसिल और सभी आईआईटी से कहेंगे कि वे जेईई-अडवांस के टेस्ट पेपर के डिजाइन पर फिर से चर्चा करें। हमें लगता है कि मौजूदा टेस्ट पेपर छात्रों की क्षमता के हिसाब से ठीक नहीं है।` आने वाले दिनों में आईआईटी काउंसिल से मीटिंग में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। उस मीटिंग में मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी होंगे। बता दें कि पेपर के कठिन होने का मुद्दा पहली बार नहीं उठा है। छात्रों पर प्रेशर कम करने के लिए एनडीए सरकार ने सिंगल एग्जाम फॉर्मेट लागू करने का विचार दिया था। हालांकि, उसे लागू नहीं किया जा सका।

जारी करनी पड़ी थी एक और मेरिट लिस्ट: गौरतलब है कि एचआरडी मिनिस्ट्री की आपत्ति के बाद आईआईटी कानपुर ने जेईई अडवांस्ड-2018 की एक और मेरिट लिस्ट जारी की है। पहली लिस्ट में सिर्फ 18 हजार 138 छात्र-छात्राओं को पास घोषित किया गया था, लेकिन गुरुवार की लिस्ट में 13 हजार 850 और छात्रों को पास घोषित किया गया।

मार्क्स में फर्क: पहली लिस्ट में जनरल कैटिगरी के स्टूडेंट्स के लिए न्यूनतम मार्क्स 126 रखे गए थे। ओबीसी छात्रों के लिए 114 और एससी/एसटी कैटिगरी के लिए 63 मार्क्स लाने की बाध्यता थी। दूसरी लिस्ट में जनरल छात्रों के लिए न्यूनतम 90, ओबीसी के लिए 81 और एससी/एसटी कैटिगरी में एडमिशन के लिए 45 नंबर की अनिवार्यता थी।

इस साल से आईआईटी में हर प्रोग्राम में 14 प्रतिशत सीटें केवल छात्राओं के लिए सुरक्षित रहेंगी। यही नियम एनआईटीज में भी नामांकन में लागू होंगे। पहली मेरिट लिस्ट में मात्र 2000 यानी केवल 11 प्रतिशत लड़कियां ही इस दायरे में आ रही थीं, जबकि कट ऑफ घटाने से 2000 और लड़कियों को एडमिशन मिल सकेगा।

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