कोरोना होने पर घटती है मर्दो की सेक्स पावर, रिसर्च में हुए कई बड़े खुलासें

कोरोना का इंफेक्शन पुरुष का सेक्स पावर और लैंगिकता पर प्रभाव डालता है. ये सेक्स की क्षमता कमज़ोर करता है. इससे मर्दों के स्पर्म कमजोर हो जाते हैं और प्रजनन क्षमता भी घटने लगती है.

कोरोना का इंफेक्शन पुरुष का सेक्स पावर और लैंगिकता पर प्रभाव डालता है. ये सेक्स की क्षमता कमज़ोर करता है. इससे मर्दों के स्पर्म कमजोर हो जाते हैं और प्रजनन क्षमता भी घटने लगती है. एएफपी एजेंसी द्वारा जारी की गई एक खबर में एक रिसर्च के हवाले से यह दावा किया गया है कोविड के इंफेक्शन के बाद स्पर्म बनाने वाले सेल्स जल्दी कमजोर पड़ने लगते हैं. जिससे सेल्स में सूजन आ जाती है और ये ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से गुजरने लगती हैं. सेल्स में ऑक्सिजन की जितनी ज़रूरत होती है, उससे कम अगर उसकी भरपाई होती है तो उससे होने वाले दबाव को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस कहते हैं.

यह नई स्टडी एक्सपेरिमेंटल एविडेंस यानी कोरोना से पहले और बाद में व्यक्तियों पर उसके परिणामों के अध्ययन से मिली जानकारियों और प्रमाणों पर आधारित हैं. एक और स्टडी जो ‘फर्टिलिटी एंड स्टर्लिटी‘ (Fertility and Sterility) नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है. इस स्टडी के अनुसार शोधकर्ताओं का दावा है कि जिस तरह से कोरोना वायरस का प्रभाव फेफड़ों पर होता है उसी तरह से यह वायरस पुरुषों के अंडकोष पर भी प्रभाव डालते हैं.

कोरोना का प्रभाव पुरुषों के बच्चा पैदा करने की शक्ति पर क्या असर डालता है, इस पर रिसर्चर्स काम कर रहे हैं. जर्मनी में जस्टस लीबिग यूनिवर्सिटी में बहिजाद हाजीजादेह मालेकी और बख्तियार टार्टिबियन शोध कार्य को बढ़ा रहे हैं. इन दोनों ने दो महीनों में कोरोना प्रभावित 84 पुरुषों पर शोध किया.

इस रिसर्च से जो जानकारियां मिलीं उनकी तुलना इन्होंने 104 तंदुरुस्त पुरुषों की सेहत से मिली जानकारियों से की. इन्होंने पाया कि जिन पुरुषों को कोरोना हुआ था उनके स्पर्म निर्माण करने वाले सेल्स में सूजन आ गए हैं और उन पर ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस का प्रभाव पड़ा है. सीधे तौर पर कहा जाए तो इससे उनकी प्रजनन क्षमता यानी बच्चे पैदा करने की शक्ति में कमी होती हुई दिखाई दी.

इस बारे में जब कुछ ऐसे आईवीएफ एक्सपर्ट या डॉक्टरों से पूछा गया जो इस खास रिसर्च में भागीदार नहीं रहे हैं तो ज्यादातर एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि यह जानकारी कोई चौंकाने वाली नहीं है. वैसे भी कोविड के इंफेक्शन के बाद मरीजों में इम्युनिटी यानी शारिरिक शक्ति कम हो जाती है. इसका प्रभाव प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है.

वैसे तो इंफ्लुएंजा होने पर भी स्पर्म काऊंट कम हो जाते हैं. यहां देखना यह है कि इसका असर कितने दिनों तक कायम रहता है. और क्या कोरोना के बाद जो प्रभाव फर्टिलिटी रेट और सपर्म काऊंट पर पड़ रहा है उसकी रिकवरी हो सकती है या नहीं?

जिन पुरुषों के शुक्राणु पहले से ही कमजोर होते हैं, उन्हें रिकवरी में उतना ही टाइम लगता है. जिनकी शुक्राणु की क्षमता अच्छी होती है वैसे पुरुष जल्दी रिकवरी कर लेते हैं. और थोड़े दिनों के बाद उनके सेल्स से जुड़ी रासायनिक प्रक्रिया सामान्य हो जाती है. जिस व्यक्ति को ठीक होने में जितना टाइम लगता है उनके शुक्राणु निर्माण की शक्ति को भी पहले की तरह काम करने में उतना ही वक्त लगता है.

इन रिसर्चरों की यह भी मांग है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सामने आए और इस बात को स्वीकार करे कि कोरोना का प्रभाव पुरुषों की जनेन्द्रियों पर भी पड़ता है. लेकिन दूसरी तरफ ऐसे कई रिसर्चर्स हैं जो इनके द्वारा किए गए शोध पर संदेह जताते हुए कहते हैं कि इतनी जल्दी किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं है, अभी और गहन शोध करने की ज़रूरत है.

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