लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें, नहीं तो हो जाएगी समस्या

  • आप भी रहते हैं लिव-इन रिलेशनशिप में तो इन नियमों को जानें
  • कानून के हिसाब से दोनों लोगों को विवाहित माना जाएगा
  • अगर नहीं जानी ये बातें तो हो जाएंगी बड़ी दिक्कतें

आजकल लोग लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं। मतलब शादी से पहले एक-दूसरे को जानते हैं, समझते हैं और अगर अच्छा लगता है तो जिंदगी साथ में बिताते हैं, नहीं तो अलग हो जाते हैं। लेकिन जो लोग लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों को इसके नियमों के बारे में नहीं पता होता है, जिसकी वजह से उन्हें बाद में दिक्कतें होती हैं। तो चलिए आपको इन नियमों के बारे में।

शादीशुदा माना जाएगा

अक्सर आज के युवा पहले लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं, एक-दूसरे को समझते हैं और फिर शादी करते हैं। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि नियम ये कहता है कि अगर लड़का-लड़की लिव-इन-रिलेशनशिप में एक कपल की तरह रह रहे हैं, साथ सो रहे हैं, साथ खा रहे हैं, तो कानूनन इस कपल को शादीशुदा माना जाएगा।

बच्चा वैध होगा

कानून कहता है कि अगर आप लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं, और आपकी पार्टनर गर्भवती हो जाती है, और बच्चे का जन्म होता है तो वो बच्चा वैध माना जाएगा। जैसे एक शादीशुदा कपल कपल एक बच्चे की देखभाल करता है, ठीक उसी तरह लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले कपल को भी उस बच्चे की ऐसे ही देखभाल करनी पड़ती है। वहीं, गर्भपात, कन्या भ्रूण हत्या जैसे सभी कानून लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों पर भी पूरी तरह लागू होते हैं।

बच्चा गोद नहीं ले सकते

जैसे कि कानून के हिसाब से लिव-इन-रिलेशनशिप में रहना वाला कपल बच्चे को जन्म दे सकता है, लेकिन इसके विपरीत ये कपल किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकता, क्योंकि कानून उनको इस बात का अधिकार नहीं देता है। ऐसे में अगर लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाला कोई कपल किसी बच्चे को अनाथालय या किसी दूसरे तरीके से गोद लेने की सोचता है, तो वो ऐसा नहीं कर सकता है।

धोखा देना दंडनीय अपराध

अगर लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले दोनों लोग कमाने वाले हैं, तो आपसी खर्चा दोनों की म्यूचुअल अंडरस्टैंडिग के आधार पर होगा। वहीं, अगर आप अपने पार्टनर से अलग होते हैं, तो आप गुजारे भत्ते की मांग तभी कर सकती हैं, जब आप लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाली बात को साबित कर पाएं। इसके अलावा अगर लिव-इन-रिलेशनशिप में एक पार्टनर दूसरे को धोखा देता है, तो ये दंडनीय अपराध माना जाता है। पीड़ित अगर चाहे तो आईपीसी की धारा 497 के तहत मामला दर्ज करा सकते हैं, और इसमें सजा का भी प्रवाधान है।

 

 

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