ज़रूर देखें दिल वालों की दिल्ली

वैसे तो कहते हैं दिल्ली दिलवालों की है लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि दिल्ली घूमने वालों की भी है। असल में देश की राजधानी है ही ऐसी कि लोग यहां आने के बाद अपने आप को घूमने से रोक ही नहीं पाते। दिल्ली के बाजार, दर्शनीय स्थल, धार्मिक स्थल यहां की चटपटी चाट भारतीयों के साथ-साथ विदेशियों को भी बेहद आकर्षित करती है।
आइए जानें क्या है दिल्ली में खास:-
1. इंडिया गेट:- राजपथ पर बने इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए 90,000 भारतीय जवानों की याद में बनाया गया है। 1971 के दौरान भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में यहां अमर जवान ज्योती की स्थापना की गई जो 1971 से लगातार जल रही है। 160 फीट ऊंचे इस शहीद स्मारक को दिल्ली का पहला दरवाजा भी माना जाता है। इसकी नींव 1921 में ब्रिटिश सरकार ने रखी थी। इसके चारों ओर पार्क है जो पिकनिक का एक अच्छा प्वाइंट भी है। इसके लिए आपको कोई टिकट लेने की भी ज़रूरत नहीं है। इसके पास आप राष्ट्रपति भवन, संसद भी देख सकते हैं। केंद्रीय सचिवालय मैट्रो और बस स्टेशन इसके निकटतम सार्वजनिक परिवहन है।
2. जंतर मंतर:- इंडिया गेट पास मौजूद जन्तर मन्तर का निर्माण महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 1724 में करवाया था। यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की एक मिसाल है। ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। यहां मौजूद सम्राट यंत्र सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है। ये सभी देखने के लिए आपको टिकट खरीदना होगा।
आपको बता दें दिल्ली के साथ-साथ जय सिंह ने ऐसी वेधशालाओं का निर्माण जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी किया था।
3. लाल किला:- लाल किले का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1639 में करवाया था। लाल किले की दिवारें उच्चस्तर की कलाओं से सजी हैं। यहां की कलाकृतियां फारसी, यूरोपीय और भारतीय कलाओं का मिश्रण है। लाल किले के अंदर घूमने के लिए और भी बहुत कुछ है जैसे रंग महल, खास महल, दीवान-ए-आम, दिवाने-ए-खास इत्यादी। यह किला भारत की शान है इसी किले पर हर स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं और भाषण देते हैं। यहां रोजाना हज़ारों देश-विदेश से आए सैलानी इस ऐतिहासिक धरोहर का दीदार करते हैं। लाल किला देखने का समय सुबह 9.30 बजे से दोपहर 4.30 बजे तक, दिन मंगलवार से रविवार है। टिकट शुल्क भारतीयों के लिए 10/- और विदेशियों के लिए 150/- है।
4. जामा मस्जिद:- लाल किले से महज 500 मीटर की दूरी पर जमा मस्जिद स्थित है, जो कि भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण 1665 में शाहजहाँ ने शुरु करवाया था। उस समय इस मस्जिद को बनने में 6 साल का समय और 10 लाख रुपये लगे थे। बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी ये मिस्जद बेहद खूबसूरत है। इसके उपर बने गुम्बदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है। जो पर्यटकों को दूर से ही अपनी तरफ खींचती है।
5. कमल मंदिर:- दिल्ली का यह ऐसा मंदिर है जहां न कोई मूर्ति है और न ही किसी प्रकार का कोई पूजा पाठ किया जाता है। इसके विपरीत यहाँ पर अलग-अलग धर्मों से संबंधित विभिन्न पवित्र लेख पढ़े जाते हैं। मंदिर का उद्घाटन 24 दिसंबर 1986 को हुआ लेकिन आम जनता के लिए यह मंदिर 1 जनवरी 1987 को खोला गया। इस मंदिर की आकृति कमल के फूल जैसी ही इसलिए इसे लोटस टेंपल के नाम से ही पुकारा जाता है, मंदिर का वास्तुकार फ़रीबर्ज़ सहबा ने तैयार किया है। इस अनोखे मंदिर को देखने के लिए आपको कोई टिकट लेने के ज़रूरत नहीं है क्योंकि यहां एंट्री एकदम फ्री है। सोमवार के दिन यह मंदिर बंद होता है। गर्मी के दिनों में आप इस मंदिर को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक और सर्दियों में सुबह 9 बजे से शाम 5.30 बजे तक देख सकते हैं।
6. कुतुबमीनार:- इस मीनार का निर्माण 1199 में कुतुबुउद्दीन ऐबक ने शुरू किया था और इल्तुतमिश ने इसे 1368 में पूरा करवाया था। इस पांच मंजिला इमारत की ऊंचाई 72.5 मीटर है जिसमें 379 सीढ़ियां हैं। पहले इस मीनार का नाम ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार के नाम पर रखा गया था। आप यहां लौह स्तंभ को भी देख सकते हैं जिसमें आज तक जंग नहीं लगा है। इस मीनार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक देख सकते है जिसके लिए भारतीयों को 10/- और विदेशियों को 250/- का शुल्क देना होगा।
7. दिल्ली हाट:- दिल्ली हाट एम्स मेट्रो स्टेशन के बहुत करीब है। यहां आने के बाद सभी राज्यों के एक साथ दर्शन हो जाते हैं क्योंकि यहां भारत के सभी प्रांतों के हस्तशिल्पों की दुकानें हैं। यहां आकर आप सभी राज्यों के व्यंजनों का भी लुत्फ उठा सकते हैं। यहां समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यकर्मों का भी आयोजन किया जाता है जो पर्यटकों का दिल जीतने के लिए काफी है। दिल्ली में दिल्ली हाट के अलावा सरोजिनी नगर, कनॉट प्लेस और उसका पालिका बाजार साथ ही करोल बाग जैसे कई ऐसे बाजार हैं जहां सुबह से शाम तक खिरदारों का जमावड़ा लगा होता है। अगर आप कभी दिल्ली आएं तो इन बाजारों में खरीदारी जरूर करें।
8. अक्षरधाम मंदिर:- भगवान स्वामीनारायण को समर्पित इस पारंपरिक मंदिर को शिल्पकारों ने प्राचीन शिल्पकला से निखारा है। यह मंदिर 10,000 वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति को बखूबी बयां करता है। मंदिर के अंदर मनोरंजन के लिए रोज प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाता है लेकिन इस मनोरंजन के लिए आपको थोड़ा शुल्क भी चुकाना होगा। अगर आपको अध्यात्म और कलाओं से लगाव है तो जब भी दिल्ली आएं एक बार अक्षरधाम मंदिर जरूर जाएं। यहां आप अक्षरधाम मैट्रो और बस स्टैंड से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते हैं।

 

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