आगरा में सात न्यायिक कर्मी कोरोना संक्रमित, आज बंद रहेंगी अदालत

संक्षेप:

  • मंगलवार को जनपद न्यायालय में सात न्यायिक कर्मी कोरोना संक्रमित।
  • जिला जज ने अदालत बंद का दिया आदेश।
  • परिसर में सैनिटाइजेशन कराया जाएगा।

आगरा- आगरा के जनपद न्यायालय में मंगलवार को सात न्यायिक कर्मी कोरोना संक्रमित पाए गए। इस कारण बुधवार को अदालत बंद रहेंगी। जिला जज ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। परिसर में सैनिटाइजेशन कराया जाएगा। संक्रमित कर्मियों से स्वयं क्वारंटीन होने के लिए कहा गया है। 

जिला जज विवेक संगल ने दीवानी को बंद रखने का आदेश मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिली रिपोर्ट के आधार पर किया। सात न्यायिक कर्मियों के कोविड-19 जांच रिपोर्ट पाजीटिव आई है। संक्रमित कर्मचारियों के संपर्क में आए लोगों से भी अपनी जांच कराने की कहा गया है। परिसर को सैनिटाइज कराया जाएगा।

बुधवार को होने वाली सुनवाई अब 18 और 27 जनवरी को  
बुधवार को दीवानी के बंद रहने के कारण इस दिन होने वाली सिविल एवं फौजदारी के मुकदमों की सुनवाई अब 27 जनवरी को नियत की गई है। जमानत प्रार्थना पत्रों पर होने वाली सुनवाई अब 18 जनवरी को होगी। 

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आरोपियों की अंतरिम जमानत अवधि 12 जनवरी से बढ़कर 18 जनवरी कर दी गई है। बाहरी न्यायालय फतेहाबाद, ग्राम न्यायालय तहसील बाह, एत्मादपुर, किरावली, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे, किशोर न्याय बोर्ड यथावत कार्य संपादित करेंगे।

उच्च न्यायालय ने जारी किए दिशा-निर्देश 
 कोविड-19 के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के तेजी से फैलने के मद्देनजर उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालयों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार, जिला न्यायाधीश न्यायालय परिसर में कोर्ट स्टाफ का न्यूनतम प्रवेश सुनिश्चित करेंगे।

कर्मचारियों की संख्या तय करने, रोटेशन के माध्यम से ड्यूटी सौंपने, साप्ताहिक आधार पर दिन व समय-स्लॉट तय करेंगे। डीएम या मुख्य चिकित्सा अधिकारी की यह राय है कि जिला और बाहरी न्यायालय परिसर को कोविड-19 के कारण किसी विशेष अवधि के लिए बंद किया जाना चाहिए तो उक्त अवधि के लिए तत्कालीन जिला न्यायालय और बाहरी न्यायालय को बंद किया जा सकता है।

युवा अधिवक्ताओं ने की वर्चुअल सुनवाई की मांग 
यूथ बार एसोसिएशन की एक बैठक मंगलवार को संस्थापक और उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के सचिव हेमंत भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित मिलने के कारण केवल वर्चुअल सुनवाई की मांग की गई। 

अधिवक्ताओं ने वर्तमान में कोरोना की तीसरी लहर से दिन प्रतिदिन बढ़ने वाली संक्रमित मरीजों की संख्या को देखते हुए न्यायालय परिसर में केवल वर्चुअल सुनवाई की मांग की। हेमंत भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में समय पर सही कदम उठा लेने से दीवानी में संक्रमण की रफ्तार थामी जा सकती है। 

कोरोना की दूसरी लहर में हम पहले ही 50 से अधिक अपने सम्मानित अधिवक्ता साथियों को खो चुके हैं। दूसरी लहर में तमाम कर्मचारी, न्यायिक अधिकारी संक्रमित हुए थे। मृतक अधिवक्ताओं के परिजनों को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई। न ही बार एसोसिएशन सहायता करने में सक्षम हो सकी। 

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