आगराः नसबंदी के बाद भी दिया बच्चे को जन्म

संक्षेप:

  • परिवार नियोजन योजना फेल
  • नसबंदी के बाद भी दिया बच्चे को जन्म
  • सीएमओ ने दिए कार्रवाई के निर्देंश

आगराः सरकार की परिवार नियोजन योजना आगरा में फेल हो गई। यहा पर नसबंदी के बाद भी छह माह के भीतर महिला गर्भवती हो गई। चिकित्सकों को मामले की जानकारी दी तो बच्चे के जन्म के बाद किसी तरह की कार्रवाई की बात कहकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। अब बच्चे के जन्म के बाद जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो बुधवार को महिला अपने पति के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची।

नसबंदी के बाद भी महिला के गर्भवती होने का मामला सामने आया बरौली अहीर, शमसाबाद रोड के चमरौली गांव में। 28 वर्षीय सुधा पत्‍‌नी बसंत कुमार के दो बच्चे पहले से थे। जिसके चलते परिवार नियोजन के लिए नौ फरवरी 2017 को बरौली अहीर के प्राथमिक स्वास्थ केंद्र पर नसबंदी करवाई थी। तीन माह बाद सुधा के बैंक एकाउंट में नसबंदी करवाने की प्रोत्साहन राशि 1400 रुपये भी आ गई। इसके तीन माह बाद ही सुधा गर्भवती हो गई।

जानकारी होने पर सुधा और बसंत प्राथमिक स्वास्थ केंद्र गए और मौजूद चिकित्सकों को बताया। बसंत का आरोप है कि स्वास्थ केंद्र के चिकित्सकों ने उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया और बच्चे को जन्म देने को कहा। चिकित्सकों ने इसके बाद ही कार्रवाई होने की बात भी कही। इसके बाद भी दंपती स्वास्थ केंद्र के चक्कर लगाते रहे।

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वहीं 26 मई 2018 को एक निजी अस्पताल में सुधा ने बच्ची को जन्म दिया। बच्चे को जन्म देने के बाद दोबारा से प्राथमिक स्वास्थ केंद्र गए और बच्चे के जन्म की बात बताई एवं कार्रवाई करने को कहा। बसंत के अनुसार चिकित्सकों ने उसे केंद्र से भगा दिया। इसके बाद किसी परिचित के संपर्क से दंपती महफूज संस्था के पश्चिमी उप्र के समन्वयक नरेश पारस से मिले।

बुधवार को नरेश दोनों को जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार के पास लेकर पहुंचे। जिलाधिकारी ने पहले तो किसी सहायता या कार्रवाई के लिए दो टूक इंकार कर दिया लेकिन बाद में सीएमओ से सलाह कर सहायता राशि दिलवाने का आश्वासन दिया। इस मामले में सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि नसबंदी के दो फीसद मामले फेल हो जाते हैं। ऐसे केस में तीस हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है।

 

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