सीएम योगी ने अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार के साथ किया उनकी अस्थि का विसर्जन

संक्षेप:

  • सीएम योगी पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर
  • 10 करोड़ की परियोजनाओं पर एक शब्द नहीं बोले सीएम
  • बटेश्वर के विकास की उम्मीद टूटी

आगरा: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बटेश्वर पहुंच गए हैं. उनके पहुंचते ही तेज बारिश शुरू हो गई. इससे प्रशासनिक अधिकारियों में हलचल मच गई, लेकिन कुछ पल तेज बारिश होने के बाद रफ्तार कुछ धीमी हुई.

अस्थि कलश को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार भी दिल्ली से यहां पहुंचा. यमुना तट पर पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार ने सीएम योगी के साथ अस्थि विसर्जन किया. विसर्जन के दौरान तमाम प्रशासनिक अधिकारी और  बीजेपी नेता मौजूद रहे.

शनिवार को आधा घंटा देरी से सीएम योगी का हेलीकॉप्टर बटेश्वर पहुंचा. हर तरफ से पुलिस प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है. बाह रोड पर बने हैलीपेड से सीधे सीएम यमुना किनारे बने मंदिरों की श्रृंखला में पूजा अर्चना करने पहुंचे. यहां करीब आधा घंटा ईश्वर आराधना में बिताने के बाद अटल जी के परिजनों के साथ 11.40 बजे सीएम योगी ने और उनके परिजनों के साथ यमुना तट पर अस्थि विसर्जन किया.

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अस्थि विसर्जन और बटेश्वर मंदिर में पूजा और दर्शन के बाद सीएम योगी पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक निवास को देखने के लिए अधिकारियों के साथ गए.

इससे पहले सीएम योगी के बटेश्वर आगमन को लेकर जहां लोगों को विकास की परियोनाओं की उम्मीद थी, वहीं उनकी उम्मीद उस वक्त टूट गई, जब सीएम योगी ने विकास के नाम पर एक शब्द नहीं बोला. अंदेशा जताया जा रहा था कि सीएम योगी अटल जी के अस्थि विसर्जन के दौरान 10 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन सीएम योगी उनके पैतृक घर तक नहीं गए.

अस्थि विसर्जन के बाद योगी आदित्यनाथ नेमिनाथ जैन मंदिर गए. यहां से वह श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सीधे लखनऊ के लिए रवाना हो गए. सीएम योगी अटल जी के पैतृक घर नहीं गए. जिससे परिवार के लोगों में निराशा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां की जनता के साथ हर बार अन्याय किया जाता है. बीजेपी वोट बैंक के लिए ये सब कर रही है. इसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक निवास का जीर्णोद्धार, बटेश्वर धाम में विकास कार्य, वन विभाग की कोठी का जीर्णोद्धार शामिल है. यह वही वन विभाग की कोठी है, जहां 1942 में किशोरावस्था में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने आजादी की लड़ाई में भाग लिया था. रक्षाबंधन के अगले दिन 1942 में बटेश्वर मंदिर से अटल जी ने भीड़ के साथ वन विभाग की कोठी में तोड़फोड़ की थी.

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