Lok Sabha Election 2019: फतेहपुर सीकरी में राज बब्बर के सामने बाहुबली गुड्डु पंडित बड़ी चुनौती

संक्षेप:

  • कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के सामने बड़ी चुनौती है
  • 2009 में राज बब्बर यहां ग्लैमर लेकर आए थे
  • वेस्ट यूपी की चर्चित सीट फतेहपुर सीकरी मुगलकालीन स्मारकों और शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के लिए जानी जाती हैं

फतेहपुर सीकरी: फतेहपुर सीकरी ने पिछले दो लोकसभा चुनावों में ग्लैमर और हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों को नकार दिया है. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के सामने बड़ी चुनौती है. 2009 में लोकसभा सीट बनने के बाद से ही फतेहपुर सीकरी चर्चा में रही है. 2009 में राज बब्बर यहां ग्लैमर लेकर आए थे. वहीं 2014 में अमर सिंह, लेकिन दोनों को हार का समना करना पड़ा. इस बार बीजेपी ने जहां अपने मौजूदा सांसद बाबू लाल का टिकट काटकर राजकुमार चाहर को मैदान में उतारा है. वहीं गठबंधन ने बाहुबली नेता गुड्डू पंडित पर दांव लगाया है. राज बब्बर कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यानी मुकाबला हाई वोल्टेज होने से साथ-साथ त्रिकोणीय दिख रहा है.

वेस्ट यूपी की चर्चित सीट फतेहपुर सीकरी मुगलकालीन स्मारकों और शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के लिए जानी जाती हैं. मुगलकाल में सम्राट अकबर की राजधानी फतेहपुर सीकरी में बाबा बटेश्वरनाथ मंदिर की भी खास मान्यता है. दूसरे चरण में 18 अप्रैल को इस बार होने वाले चुनाव में फतेहपुर सीकरी में सियासी दलों की पकड़ के साथ व्यक्तिगत धमक का असर भी साफ दिख रहा है.

फतेहपुर सीकरी का राजनीतिक इतिहास

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फतेहपुर सीकरी सीट 2009 में अस्तित्व में आई. तब कांग्रेस से राजबब्बर प्रत्याशी थे. मगर बीएसपी उम्मीदवार पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय ने राजब्बर को हरा दिया था. चौधरी बाबूलाल यहां तीसरे नंबर पर रहे थे. 2014 की मोदी लहर में यहां बीजेपी का कमल खिला. बीजेपी के चौधरी बाबूलाल जीत गए थे. 2014 में कांग्रेस ने अपना कैंडिडेट नहीं उतारा था. गठबंधन में यह सीट आरएलडी के पास चली गई थी. कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन से ठाकुर अमर सिंह चुनाव मैदान में कूदे थे, लेकिन वह मुख्य मुकाबले से बाहर होकर चौथे स्थान पर खिसक गए थे. बीएसपी की सीमा उपाध्याय मुख्य मुकाबले में रही थी.

फतेहपुर सीकरी में पांच विधानसभा सीट

फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर पांच विधानसभा क्षेत्र आगरा ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद और बाह शामिल हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में पांचों सीटों पर बीजेपी का कमल खिला था.

जीत की आस में राजबब्बर

राजबब्बर 2014 में गाजियाबाद सीट पर बीजेपी के वीके सिहं से हार गए थे. उससे पहले वह 1999 और 2004 में लगातार दो बार आगरा सीट से जीतकर सांसद बने थे. 2009 में फतेहपुर सीकरी से हारने के बाद वह फिरोजाबाद उपचुनाव में पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्न डिंपल यादव को हराकर संसद पहुंचे थे. इस बार फिर जीत की आस में हैं.

बाहुबली गुड्डू पंडित

मधुमिता हत्याकांड में गवाह होने के कारण चर्चा में आकर पहचान बनाना। 2007 में बीएसपी के टिकट और 2012 में एसपी के टिकट से बुलंदशहर की डिबाई विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह को हराना

कौन हैं राजकुमार चाहर

बीजेपी के राजकुमार चाहर के लिए फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़ना, क्षेत्र में सक्रियता, किसान और आम आदमी से जुड़ाव है, लेकिन चुनौतियों में बीजेपी के लिए सीट को बरकरार रखना, नामवर राजबब्बर को टक्कर देना, गठबंधन के दलित मुस्लिम और जाट समीकरण से पार पाना है.

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