आगरा में किसान को 19 हज़ार किलो आलू बेचकर हासिल सिर्फ 490 रुपए

संक्षेप:

  • 19 हज़ार किलो आलू बेचकर मिले सिर्फ 490 रुपये
  • पीएम को भेजा मनी ऑर्डर
  • इच्छामृत्यु की मांग भी कर चुका है किसान

आगरा: आगरा में किसानों से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आगरा के बरौली अहीर के रहने वाले किसान प्रदीप शर्मा को करीब 19000 किलो (19 टन) आलू बेचने के बाद सिर्फ 490 रुपए ही हासिल हुए. इससे नाराज़ प्रदीप ने बचे हुए 490 रुपए भी पीएम नरेंद्र मोदी को मनी ऑर्डर के जरिए भेज दिए.

प्रदीप का कहना है कि बीते चार सालों से लगातार उसे आलू की फसल में नुकसान हो रहा है. बीते साल भी प्रदीप ने अपनी 10 एकड़ जमीन में आलू की बुवाई की थी. इसमें करीब 1150 पैकेट (50 किग्रो प्रति पैकेट) आलू की पैदावार हुई. प्रदीप का कहना है कि ये काफी अच्छी पैदावार है जिसे 24 दिसंबर को 368 पैकेट (18828 किग्रा) आलू महाराष्ट्र की अकोला मंडी में बेचा था.

साल 2016 में भी उसी 15 एकड़ फसल खराब हो गई थी. इस फसल का बीमा भी करवाया गया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. प्रदीप ने बताया कि बीते दिनों आगरा आए उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा से मिले थे और दिल्ली जाकर केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह को अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली है.

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NAFIS सर्वे के मुताबिक गांव में रह रही आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी किसानी या दिहाड़ी मजदूरी से अपना खर्चा चला रहा है. गांव में रह रहे परिवार की औसत आमदनी 8,931 रुपए है जिसका सबसे बड़ा हिस्सा 3140 रुपए करीब 35% अभी भी किसानी से ही आ रहा है. इस आमदनी का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा 3025 रुपए करीब 34% दिहाड़ी मजदूरी से आ रहा है. सरकारी या प्राइवेट नौकरी से अभी भी सिर्फ 1444 रुपए सिर्फ यानी ग्रामीण आमदनी का सिर्फ 16% हिस्सा ही आ रहा है.

बकाया कर्ज के मामले में आईओआई की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि से जुड़े 52.5 प्रतिशत परिवारों और 42.8 प्रतिशत गैर-कृषि परिवारों कर्ज में दबे हैं. हालांकि सर्वे कहता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के 88.1 प्रतिशत परिवारों के पास बचत खाते हैं और 55% किसान परिवारों के पास भी बैंक खाता उपलब्ध है. किसान परिवारों की सालाना बचत औसतन 17,488 रुपए है. कृषि से जुड़े करीब 26 प्रतिशत परिवार और गैर-कृषि क्षेत्र के 25 प्रतिशत परिवार बीमा के दायरे में है. इसी प्रकार, 20.1 प्रतिशत कृषक परिवारों ने पेंशन योजना ली है जबकि इसके मुकाबले 18.9 प्रतिशत गैर-कृषक परिवारों के पास पेंशन योजना है.

एक ग्रामीण परिवार की औसत सालाना आय 1,07,172 रुपये है, जबकि गैर-कृषि गतिविधियों से जुड़े परिवारों की औसत आय 87,228 रुपए है. हालांकि 2016 के आर्थिक सर्वे पर नज़र डालें तो कृषि पर निर्भर प्रमुख 17 राज्यों में किसानों की सालाना आय का औसत बीस हज़ार रुपए है. इस हिसाब से किसान हर महीने क़रीब 1,700 से 1,800 रुपए में अपने परिवार को पाल रहा है. एसोचैम के एक अनुमान के मुताबिक देश में कृषि इसलिए घाटे का सौदा साबित हो रही है क्योंकि हम जि‍स फल या सब्‍जी के लि‍ए दि‍ल्‍ली में 50 रुपए देते हैं. उसका व्‍यापारी कि‍सान को 5 से 10 रुपए ही देता है.

आपको बता दें कि प्रदीप बीते साल जुलाई में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग भी कर चुका है. प्रदीप का दावा है कि साल 2015 में उसका 18 एकड़ आलू सरकारी दवा के छिड़काव से खराब हो गया था. उसने तब कृषि विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर मुआवजा दिलाने की मांग की लेकिन कुछ नहीं हुआ.

प्रदीप के मुताबिक ये आलू बेचकर उसे 94677 रुपये मिले थे. इसमें से 42030 रुपये मोटर भाड़ा, 993.60 रुपये उतराई, 828 रुपये कांटा कटाई, 3790 दलाली, 100 रुपये ड्राफ्ट कमीशन, 400 रुपये छटाई में खर्च हो गए और 1500 रुपये नकद ले लिए गए. इस सब में उसका कुल खर्चा 48187 रुपए हुआ जिसमें से 46490 रुपए उसे मिले थे. इसके बाद कोल्ड स्टोरेज ने हर पॉकेट का 125 रुपये लिया और उसे 46,000 रुपये कोल्ड स्टोरेज मालिक को देने पड़े जिसके बाद कमाई के बतौर उसके हिस्से सिर्फ 490 रुपए ही बचे रह गए.

प्रदीप ने कहा कि पीएम लगातार किसानों की बात कर रहे हैं लेकिन ज़मीन पर हालात अभी भी ऐसे ही बने हुए हैं. पीएम तक ये संदेश पहुंच जाए इसके लिए उसने इन 490 रुपयों का मनी ऑर्डर बनवाकर भेज दिया है. प्रदीप को उम्मीद है कि उसका मनी ऑर्डर मिलने के बाद शायद पीएम को किसानों का दर्द समझ आएगा और वह किसानों की कुछ मदद करेंगे. उसने कहा कि उसने पत्र में यह भी लिखा है, `अगर आप मेरी मदद नहीं कर सकते तो मुझे आत्महत्या करने की अनुमति दे दें.

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