सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर काटे जा रहे थे पेड़, पर्यावरण प्रेमियों में गुस्सा

संक्षेप:

  • कुम्भ को लेकर इलाहाबाद में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य
  • चौड़ीकरण के नाम पर धड़ल्ले से काटे जा रहे हरे-भरे पेड़
  • हाईकोर्ट ने लगा दी है रोक

इलाहाबाद: इलाहाबाद में जनवरी 2019 में आयोजित होने वाले कुम्भ को लेकर शहर में तेजी से निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन निर्माण कार्यों की आड़ में शहर की हरियाली को भी उजाड़ा जा रहा है। सड़कों और चौराहों के चौड़ीकरण के नाम पर धड़ल्ले के हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। जिसको लेकर जहां पर्यावरण प्रेमियों में गुस्सा है। वहीं मामले के हाईकोर्ट में पहुंचने पर कोर्ट ने भी डीएम की इजाजत के बगैर हरे पेड़ काटे जाने पर रोक लगा दी है।

संगमनगरी इलाहाबाद कुम्भ के आयोजन के लिए तैयार हो रही है। लेकिन इसकी कीमत शहर की शोभा बढ़ाने वाले हरे भरे पेड़ों को चुकानी पड़ रही है। सड़कों और चौराहों के चौड़ीकरण के लिए अब तक 1800 से ज्यादा पेड़ों की बलि प्रशासन ने दे दी है। सैकड़ों साल पुराने पेड़ों के काटे जाने से शहर की सड़के जहां उजाड़ और वीरान सी दिखने लगी है।

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वहीं लोगों को शुद्ध वायु और छांव देने के लिए भी सड़कों के किनारे अब पेड़ नहीं बचे हैं। विकास और निर्माण के नाम पर अंधाधुन्ध तरीके से काटे जा रहे हरे भरे पेड़ों को लेकर स्थानीय लोगों का भी विरोध शुरु हो गया है। छात्रों से लेकर, अधिवक्ता और प्रकृति प्रेमी पेड़ काटे जाने के विरोध में सड़क पर उतर आये हैं।

वहीं इलाहाबाद के जिलाधिकारी सुहास एलवाई भी मानते हैं कि कुम्भ के आयोजन को लेकर बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान हुआ है। उनका कहना है कि सभी पेड़ मानकों का पालन करते हुए सक्षम अधिकारी की अनुमति से काटे गए हैं। डीएम के मुताबिक अब तक शहर में कुम्भ की तैयारियों को लेकर लगभग 1800 पेड़ काटे गए हैं। जबकि इसके बदले एक लाख पेड़ लगाने की भी कार्य योजना है। डीएम के मुताबिक हाईकोर्ट के निर्देश पर एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। भविष्य में कमेटी की जांच के बाद सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही काटे जायेंगे।

बहरहाल, इलाहाबाद में जिस तेजी से विकास के लिए पेड़ काटे जा रहे उससे जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का भी खतरा बना हुआ है। ऐसे में जरुरत इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर ही पेड़ काटे जायें। जिससे विकास भी हो और हमारा पर्यावरण भी संरक्षित रहे। 

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