प्रयागराज में आज से अखाड़ों की पेशवाई शुरू

संक्षेप:

  • प्रयागराज में कुंभ की तैयारियों के बीच आज से अखाड़ों की पेशवाई शुरू
  • श्रीपंच दशनाम जूना और श्रीपंच अग्नि अखाड़े की हाथी, घोड़े, ऊंट और बैंड बाजे के साथ हुई पेशवाई की शुरुआत
  • बड़ी संख्या में अखाड़े के महामंडलेश्वर, महंत और संत हुए शामिल

प्रयागराज: कुंभ की तैयारियों के बीच मंगलवार से अखाड़ों की पेशवाई शुरू हो गई है। मंगलवार को सबसे बड़े अखाड़े श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा और श्रीपंच अग्नि अखाड़े की पेशवाई की शुरुआत हुई। जूना अखाड़े की पेशवाई में शामिल होने के लिए अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि प्रयागराज पहुंच चुके हैं। पेशवाई अखाड़े के शिविर मौज गिरि से सुबह 11 बजे शुरू हुई। इसमें बड़ी संख्या में अखाड़े के महामंडलेश्वर, महंत और संत शामिल हुए।

मंगलवार से ही अखाड़ों की पेशवाई का क्रम शुरू हो जाएगा जो 13 जनवरी तक चलेगा। 27 दिसंबर को श्रीपंच दशनाम आह्वान अखाड़ा, 1 जनवरी को श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, 2 जनवरी को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, 3 जनवरी को श्री शंभू पंच अटल अखाड़ा, 10 जनवरी को श्रीपंचायती अखाड़ा नया उदासीन, 11 जनवरी को श्रीपंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन और 13 जनवरी को श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल की पेशवाई निकलेगी।

अखाड़े के महंत पंचानन गिरि ने कहा है कि राधे मां पर अब कोई आरोप नहीं है इसलिए उन्हें क्लीनचिट मिलने के बाद पेशवाई में आने में कोई परेशानी नहीं है। वहीं पेशवाई से ठीक पहले अखाड़े ने गोल्डन बाबा समेत पांच संतों को अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

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महिला धर्मगुरु सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां की जूना अखाड़े में महामंडलेश्वर के रूप में वापसी तो हो गई हो लेकिन प्रयागराज के कुंभ मेले में मंगलवार को निकलने वाली जूना अखाड़े की पेशवाई में वह शामिल नहीं होंगी। इस पेशवाई में अखाड़े के करीब दो सौ महामंडलेश्वर बैंड बाजे और हाथी-घोड़ों के बीच रथ पर रखे चांदी के हौदों पर बैठकर शाही अंदाज में कुंभ मेले में प्रवेश करेंगे। जूना अखाड़े ने राधे मां के पेशवाई में शामिल नहीं होने की पुष्टि तो कर दी है लेकिन अखाड़े में बहाल किए जाने और महामंडलेश्वर की पदवी वापस किए जाने के बावजूद वह पेशवाई में क्यों शामिल नहीं होंगी, इस बारे में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। अखाड़े के जिम्मेदार लोगों का मानना है कि, राधे मां के आते ही उनके पुराने किस्से फिर से सामने आने लगेंगे इसलिए उन्हें पेशवाई में शामिल नहीं कराने का फैसला किया गया है। जानकारी यह भी मिली है कि जूना अखाड़ा राधे मां को पहले और दूसरे शाही स्नान में भी नहीं शामिल कराना चाहता। अखाड़े की रणनीति है कि राधे मां को 10 फरवरी को होने वाले तीसरे शाही स्नान के मौके पर ही बुलाया जाए।

अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्नान ही कुंभ मेले के खास आकर्षण होते हैं। मंगलवार को निकलने वाली श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई में हाथी, घोड़े, ऊंट और बैंड बाजे शामिल होंगे। पेशवाई विभिन्न मार्गों से होते हुए कुंभ मेला क्षेत्र में जूना अखाड़े के छावनी पहुंचेगी। इसके बाद कुंभ मेले तक साधु-संत छावनी में ही रहेंगे और कुंभ के दौरान पड़ने वाले प्रमुख स्नान पर्वों पर शाही स्नान भी करेंगे।

महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा है कि प्रयागराज में होने जा रहा कुंभ मेला दिव्य, अद्भुत और कल्याणकारी होगा। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहाकि पश्चिमी देश जहां पूरे विश्व को बाजार मानते हैं, वहीं हमारी संस्कृति पूरे विश्व को परिवार मानती है। इसलिए कुंभ में आने वाले लोगों को यहां भारतीय संस्कृति और सभ्यता की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में मानवीय चेतना के उद्धार के लिए देव सत्ता यहां अलग-अगल रूपों में साकार होगी। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि इस कुंभ मेले में पूरी दुनिया के देशों से अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक दार्शनिक,विचारक और मनीषी यहां आ रहे हैं। कुंभ के महत्व को यूनेस्कों ने भी स्वीकार करते हुए इसे मानवता की अमूर्त धरोहर में शामिल कर लिया है। 

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