इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिये सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश

संक्षेप:

  • सवालों के घेरे में योगी सरकार की पहली बड़ी भर्ती प्रकिया
  • हाईकोर्ट ने दिये सीबीआई जांच के आदेश
  • 26 नंवबर को प्रगति रिपोर्ट भी तलब की

इलाहाबाद: यूपी के योगी सरकार की पहली बड़ी भर्ती प्रकिया ही गंभीर सवालों के घेरे में आ गयी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चयन प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहायक शिक्षकों के 68 हजार 500 पदों पर भर्ती प्रकिया में प्रथम दृष्टया सामने आए गंभीर भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं.

कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को यह जांच छह माह में पूरी करने के भी निर्देश दिए हैं और इस बीच 26 नंवबर को प्रगति रिपोर्ट भी तलब की है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यदि सीबीआई जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता आती हो तो सक्षम अधिकारी उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें. इस मामले में महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार इस प्रकरण की जाचं सीबीआई से कराने के कत्तई तैयार नहीं है.

ये भी पढ़े : सोनभद्र नरसंहार में आरोपियों का समाजवादी पार्टी से है कनेक्शन: CM योगी


यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ ने कई अभ्यर्थियों की दर्जनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित की है. उक्त मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया था कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बारकोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं. न्यायालय ने तब ही इस पर हैरानी जताते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाएं बदल दी गई हैं. इस पर महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मामले की पर्याप्त जांच का भरोसा दिया था साथ ही यह भी आश्वासन दिया था कि इन मामलों में दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा.

जिसके बाद तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाकर मामले की जांच किए जाने का दावा भी सरकार की ओर से किया गया, लेकिन गुरूवार को सुनाए फैसले में जांच कमेटी के रवैये पर न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जिन अभ्यर्थियों को स्क्रूटनी में रखा गया था, उनके भी चयन पर अब तक निर्णय नहीं लिया गया.  कोर्ट ने कहा कि जांच कमेटी में दो सदस्य बेसिक शिक्षा विभाग के ही हैं. न्यायसंगत अपेक्षा के सिद्धांत के तहत दोनों को जांच कमेटी में नहीं रखा जाना चाहिए था क्योंकि उसी विभाग के अधिकारी उक्त जांच के दायरे में हैं.

अपने आदेश में कोर्ट ने आगे कहा कि वर्तमान चयन प्रक्रिया पर भारी भ्रष्टाचार और गैर कानूनी चयन के आरोप हैं. सरकार से स्वतंत्र व साफ-सुथरे चयन की उम्मीद की जाती है लेकिन कुटिल इरादे से राजनीतिक उद्देश्य पूरा करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी चयन किए गए जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारी बुरी तरह प्रभावित हुए.

कोर्ट ने कहा कि इस चयन प्रक्रिया के बाबत कोर्ट प्रथम दृष्टया मानती है कि परीक्षा कराने वाले अधिकारियों ने भ्रष्टाचार से अपने उम्मीदवारों को फाएदा पहुंचाने के लिए, अधिकारों के पद को दुरूपयोग किया. जिन अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में कम मार्क्स मिले उन्हें अधिक मार्क्स दे दिए गए वहीं कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं फाड़ दी गईं और पन्ने बदल दिए गए ताकि उन्हें फेल घोषित किया जा सके. सरकार ने बार कोडिंग की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को दी थी, उसने स्वयं स्वीकार किया है कि 12 अभ्यर्थियों की कॉपियां बदली गईं, बावजूद इसके उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की गई.

कोर्ट ने कहा कि चूंकि महाधिवक्ता कह रहे हैं कि सरकार स्वयं सीबीआई जांच कराने को तैयार नहीं है तो इन परिस्थितियों में मजबूर होकर हम स्वयं सीबीआई को इस पूरे चयन प्रक्रिया की जांच करने का आदेश देते हैं. कोर्ट ने सीबीआई को दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कानून सम्मत कार्रवाई करने को कहा है. 

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Allahabad News In Hindi here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के
लिए NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles