इलाहाबाद: काशी विश्वनाथ मंदिर के विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई

  • Tuesday | 9th May, 2017
संक्षेप:

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहुंचा काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद
  • 10 मई को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई
  • काशी विश्वनाथ मंदिर और मस्जिद के मामले की सुनवाई

इलाहाबाद- काशी विश्वनाथ मंदिर के विवाद को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई 10 मई को होगी। हाईकोर्ट की जस्टिस संगीता चंद्रा कोर्ट के इस मामले पर सुनवाई करेगी। इसमें काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और अंजुमन इस्लामिया वाराणसी के बीच मुकदमे में 1947 की स्थिति बहाल रखने एवं एक अंश ही मस्जिद रखने, शेष मंदिर के उपयोग में रहने के एडीजे वाराणसी के 23 सितम्बर 1998, 10 अक्टूबर 1997 के आदेश को सुन्नी सेन्ट्रल बोर्ड लखनऊ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याची का कहना है कि 1942 में ही मामला सिविल कोर्ट वाराणसी से निर्णीत हो चुका है। 19 सितम्बर, 1991 में पूजा अधिकार कानून आने के बाद मंदिर ट्रस्ट व अन्य ने वाद दायर किया। सिविल जज वाराणसी ने वक्फ बोर्ड की वाद में पक्षकार बनाने की अर्जी निरस्त कर दी और वाद बिन्दु तय किये। आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी में राहत न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी। याचिका में स्वयं भू भगवान विश्वेश्वर नाथ मूर्ति, सोमनाथ व्यास, राम रंग शर्मा, हरिहर पांडेय व अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी को पक्षकार बनाया गया है। मंदिर की तरफ से दाखिल मूल वाद में मस्जिद हटा कर मंदिर को कब्जा सौंपने की मांग की गयी है।

वहीं दूसरी तरफ मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि एक बीघा 9 बिस्वा, 6 धुर जमीन पर विश्वेश्वरनाथ मंदिर, गंगेश्वर, गंगादेवी, हनुमान जी, नन्दी जी, गौरी शंकर, गणेश, महाकालेश्वर, महेश्वर, श्रृंगार गौरी आदि कई मंदिर है। 2050 साल पहले महाराज विक्रमादित्य ने मंदिर बनवाया था। नारायण भट्ट पुजारी ने अकबर सम्राट के मंत्री राजा टोडरमल के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। अवैध कब्जे को हटाने की मांग में सिविल कोर्ट में मुकदमा कायम है। हाई कोर्ट के स्थगनादेश के कारण सुनवाई रुकी है। हाई कोर्ट 10 मई को सुनवाई करेगा।

बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ हैं।

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