योग गुरु स्वामी आनंद गिरि को सिडनी कोर्ट से मिली जमानत, महिलाओं के साथ मारपीट का था आरोप

संक्षेप:

  • कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आनंद गिरि जेल से रिहा हो गए.
  • योगगुरु को जमानत भले ही मिल गई हो लेकिन फिलहाल उनकी हिन्दुस्तान वापसी मुश्किल है.
  • संत आनंद गिरि पर दो अलग-अलग मौकों पर दो महिलाओं के साथ मारपीट का आरोप लगा है.

इलाहाबाद: प्रयागराज के निरंजनी अखाड़े से जुड़े संत स्वामी आनंद गिरि को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में महिलाओं के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. शुक्रवार सुबह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी की कोर्ट ने जामनत दे दी है. वहीं कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आनंद गिरि जेल से रिहा हो गए. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने जानकारी दी. योगगुरु को जमानत भले ही मिल गई हो लेकिन फिलहाल उनकी हिन्दुस्तान वापसी मुश्किल है.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि आस्ट्रेलिया के कानून के अनुसार जिस व्यक्ति पर मुकदमा चलता है उसका वतन छोड़कर बाहर जाना संभव नहीं होता है. उन्होंने बताया कि कोर्ट अब 26 मई को उनके केस पर सुनवाई करेगी.

महंत आनंद गिरी पर ये हैं आरोप

ये भी पढ़े : शहर में कोई समस्या नहीं हो तो इसके लिए गांवों को बनाना होगा मजबूत: CM बघेल


संत आनंद गिरि पर दो अलग-अलग मौकों पर दो महिलाओं के साथ मारपीट का आरोप लगा है. आरोप के मुताबिक उन्हें दो अवसरों पर हिंदू प्रार्थना के लिए अपने घरों में आमंत्रित किया गया था. जहां 2016 में उन्होंने अपने घर के बेडरूम में एक 29 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की. इसके बाद 2018 में, गिरि ने लाउंज रूम में 34 वर्षीय एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की. बता दें कि आनंद गिरि ने सीएम योगी आदित्यनाथ से भी कम उम्र में संन्यास लिया था. दीक्षा के समय योगी जहां 22 साल के थे, वहीं आनंद महज 10 साल की उम्र में नरेंद्र गिरि के संरक्षण में दीक्षा ली थी. संन्यासी के रूप में ही उन्होंने संस्कृत ग्रामर, आयुर्वेद और वेदिक फिलॉसफी की शिक्षा ली. बीएचयू से ग्रैजुएट आनंद गिरि योग तंत्र में पीएचडी की हैं. वे मंत्रयोग, हठयोग, राजयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग की ट्रेनिंग देते हैं.

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Allahabad News In Hindi here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के
लिए NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles