कुंभ में क्या है कल्पवास का विशेष महत्व, जानिए ये 21 नियम

संक्षेप:

  • संगम तट पर कल्‍पवास का विशेष महत्‍व है।
  • कल्पवासी को 21 नियमों का पालन करना चाहिए
  • दान, और देव पूजन का होता है विशेष महत्व

 

 

कुंभ 14 जनवरी मकर संक्रांति से शुरू होने वाला हैं। जिसमें लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। पूजा अर्चना करेगें। स्नान करेगें। वहीं आपको बता दें प्रयागराज दुनिया का एकमात्र ऐसा स्‍थान है जहां पर तीनों नदियां गंगा, यमुना और सरस्‍वती मिलती है।

संगम तट पर स्नान के साथ-साथ कल्‍पवास का भी विशेष महत्‍व होता है। वहीं पद्म पुराण में भी इसके महत्‍व के बारे में विशेष चर्चा की गई है। पद्म पुराण एवं ब्रह्म पुराण के अनुसार कल्पवास की अवधि पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी से प्रारंभ होकर माघ मास की एकादशी तक होती है। वहीं पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय के अनुसार कल्पवासी को 21 नियमों का पालन करना चाहिए।

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यह 21 नियम हैं पितरों का पिण्डदान, यथा-शक्ति दान, अन्तर्मुखी जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना। जिनमें से ब्रह्मचर्य, व्रत, उपवास, सत्संग, दान, और देव पूजन का विशेष महत्व है।

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