Lok Sabha Election 2019: इलाहाबाद से AAP की टिकट पर चुनाव लड़ेंगी किन्‍नर अखाड़े की भवानी मां बाल्मिकी

संक्षेप:

  • किन्‍नर अखाड़े की महामंडलेश्‍वर भवानी मां वाल्मीकि इलाहाबाद से चुनाव लड़ेंगी
  • इस्‍लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने वाली भवानी मां को आप ने टिकट दिया है
  • भवानी किन्‍नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण के बाद दूसरे स्थान पर आती हैं

इलाहाबाद: इस्‍लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने वाली किन्‍नर अखाड़े की महामंडलेश्‍वर भवानी मां वाल्मीकि अब चुनावी राजनीति में उतरने जा रही हैं. आम आदमी पार्टी ने उन्‍हें इलाहाबाद से लोकसभा का टिकट दिया है. उनके अलावा यूपी से तीन और उम्मीदवारों को उतारा गया है. आम आदमी पार्टी के वरिष्‍ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया. `आप` यूपी की लालगंज, संभल और कानपुर देहात सीट से भी चुनाव में उतरेगी.

बताया जा रहा है कि वह बीजेपी और अन्‍य दलों से टिकट मांग रही थीं लेकिन मौका नहीं मिलने पर आम आदमी पार्टी से जुड़ी हैं. बता दें कि हाल ही में संपन्‍न हुए कुंभ में किन्‍नर अखाड़ा सबके चर्चा का विषय था. कुंभ में 14 अखाड़ों ने शिरकत की थी. इस मर्तबा 14वें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को शामिल किया गया था. इसी अखाड़े की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि हैं. भवानी, किन्नर अखाड़ा आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के बाद दूसरे स्थान पर आती हैं.

यूपी में अब तक सात सीटों पर उतारे कैंडिडेट, एक का नामांकन रद्द

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भवानी मां वाल्मीकि के अलावा आप ने यूपी की तीन और सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. लालगंज (SC) से इंजिनियर अजीत सोनकर, संभल से अंजु सैनी और कानपुर देहात से आशुतोष ब्रह्मचारी को उम्मीदवार बनाया है. इससे पहले आम आदमी पार्टी ने तीन उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से एक उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया.

महामंडलेश्वर भवानी मां की जिंदगी काफी मुश्किल रही है. उनका परिवार बेहद गरीब था. पिता की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी जिससे पूरे परिवार का भरण-पोषण हो सके. 17 नवंबर 1972 को दिल्ली के चाणक्यपुरी में जन्मीं भवानी नाथ को 13 साल की उम्र में पता चला था कि वह किन्नर हैं. उन्होंने काफी कम उम्र में अपने पिता का घर छोड़ दिया था. उनके कुल 8 भाई-बहन हैं. भवानी ने 2010 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया था. वह 2012 में हज यात्रा भी कर चुकी हैं. हालांकि पांच साल बाद उन्होंने दोबारा हिंदू धर्म अपना लिया.

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