पाकिस्तान से भारत लौटी गीता का शुरू हुआ `स्वयंवर`

संक्षेप:

  • 8 युवकों में से चुनेगी अपना दूल्हा
  • लाइन में है पंडित से लेकर लेखक तक
  • 2015 में भारत लौटी थी मूक-बधिर गीता

2015 में पाकिस्तान से भारत लाई गई मूक बधिर लड़की गीता का `स्वयंवर` शुरु हो गया है। गीता से शादी के लिए इच्छुक युवकों के देशभर से प्रस्ताव आए जिनमें से 14 युवकों के प्रस्ताव छांटे गए। गीता जिसे पसंद करेगी उसी के साथ उसका विवाह संपन्न कराया जाएगा। गीता से गुरुवार को छह ऐसे युवकों का परिचय कराया जाएगा. बाकी 8 युवकों से गीता आज मिल रही है।

गीता से इन युवकों की मुलाकात इंदौर के परदेशीपुरा स्थित शासकीय विकलांग संस्था में हो रही है। गीता से शादी के इच्छुकों में अहमदाबाद से जितेश पटेल और टीकमगढ़ से अरुण नामदेव शामिल हैं। अरुण नामदेव शासकीय कर्मचारी हैं वहीं जितेश पटेल प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं

गीता से भोपाल निवासी राजकुमार स्वर्णकार (29) की भी मुलाकात करायी गयी। स्वर्णकार एक पैर से दिव्यांग हैं। पुरोहित ने बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के बाद उन्होंने गीता के लिये योग्य वर की तलाश के मकसद से फेसबुक​ पर 10 अप्रैल को वैवाहिक विज्ञापन पोस्ट किया था। इसके बाद देश भर के लगभग 50 लोगों ने गीता के साथ सात फेरे लेने की इच्छा जतायी थी। गीता की सहमति के आधार पर फिलहाल इनमें से 14 लोगों से उसकी मुलाकात करायी जानी है।

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गीता, मध्य प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय और नि:शक्त कल्याण विभाग की देख-रेख में इंदौर की गैर सरकारी संस्था "मूक-बधिर संगठन" के गुमाश्ता नगर स्थित आवासीय परिसर में रह रही है। सरकार उसके माता-पिता की खोज में जुटी है। पिछले ढाई साल के दौरान देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं। लेकिन सरकार की जांच में इनमें से किसी भी परिवार का इस मूक-बधिर युवती पर वल्दियत का दावा फिलहाल साबित नहीं हो सका है। गीता सात-आठ साल की उम्र में पाकिस्तानी रेंजर्स को समझौता एक्सप्रेस में लाहौर रेलवे स्टेशन पर मिली थी। गलती से सरहद पार पहुंचने वाली यह मूक-बधिर लड़की भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण 26 अक्तूबर 2015 को स्वदेश लौटी थी।

आनंद मूक बधिर संस्था से जुड़े ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि गीता के लिए परिचय सम्मेलन से लेकर सोशल साइट तक दूल्हे की तलाश की गई। संस्था से जुड़ी मोनिका पुरोहित के मुताबिक जिन युवकों ने बायोडाटा भेजा उनमें 70% मूक-बधिर और 30% सामान्य हैं। बायोडाटा भेजने वालों की उम्र 25 से 35 साल की उम्र के बीच है।

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