घटिया निर्माण के चलते टूटने लगा हाईवे

 निर्माणाधीन वाराणसी-लुंबिनी फोरलेन हाईवे निर्माण में सरकारी धन का बंदरबांट किस ढंग से किया जा रहा है अगर इसकी बानगी देखनी हो तो आप तेजापुर बाईपास चले जाइए।

जहां अरबों की लागत से फोरलेन निर्माण के चंद माह बाद ही टूटकर दो भागों में विभाजित हो गया है।

इतना ही नहीं, मानक के विपरीत एवं घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग से निर्मित हाईवे के टूटने के बावजूद कार्यदायी संस्था मामले से अनभिज्ञ हैं। विज्ञापन बताते चलें कि लगभग सात अरब 41 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन एनएच 233 का निर्माण जनपद में अंतिम दौर से गुजर रहा है।

जनपद की पश्चिमी सीमा पर स्थित बूढनपुर से अंबेडकरनगर के टांडा स्थित घाघरा ओवरब्रिज तक कुल 43 किमी हाईवे का निर्माण भोपाल की कार्यदायी संस्था दिलीप बिल्डकॉन द्वारा कराया जा रहा है।

कार्यदायी संस्था द्वारा मानकों को दरकिनार कर घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग से बनाई गई फोरलेन सड़क निर्माण के चंद महीने बाद ही जगह-जगह टूटकर दो भागों में विभाजित हो गई है।

इतना ही नहीं निर्माणाधीन हाईवे बूढनपुर से लोहरा के बीच जगह जगह पर टूटकर उखड़ भी रहा है।

सूत्रों की माने तो फोरलेन हाईवे के निर्माण कार्य में प्रयोग की जाने वाली लोहे की सरिया भी मानक के विपरीत है।

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