घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर हुई बढ़ोत्तरी, लोग नाव से आवागमन करने को हैं विवश

संक्षेप:

  • घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर हुई बढ़ोत्तरी
  • कई गांवों के संपर्क मार्गों पर चढ़ा पानी
  • लोग नाव से आवागमन करने को हैं विवश

लाटघाट। भारी बारिश के चलते सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोत्तरी होनी शुरू हो गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी ने कटान तेज कर दी है। कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ आया है। जिसके कारण लोग नाव से आवागमन करने को विवश हैं।

बृहस्पतिवार को डिघिया गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर 70.61 मीटर दर्ज किया गया था जो शुक्रवार को बढ़कर 71.07 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदू 70.40 मीटर है। वहीं बदरहुंआ गेज पर बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 71.32 मीटर दर्ज किया गया था जो शुक्रवार को बढ़कर 71.76 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदू 71.68 मीटर है। गांगेपुर,परसिया के किसान भूमिहीन होने के कगार पर हैं। घाघरा नदी का जलस्तर दो दिन से घट कर आज 44 से 46 सेमी बढ़ा। नदी द्वारा तेजी से कटान की जा रही है। जबकि बारिश और पानी के कारण रौनापार से लाटघाट और देवारा से लेकर बाजार गोसाईं तक सभी गांव के संपर्क मार्ग पर पानी चढ़ गया है। 

आराजी अजगरा, मसरकी से देवारा खास राजा संपर्क मार्ग, अजगरा मसरकी से अभ्भनपट्टी संपर्क मार्ग और अजगरा मसर्की से बूढ़नपट्टी संपर्क मार्ग पूरी तरह से टूट गया है। करीब सभी गांव के संपर्क मार्गों पर पानी चल गया है। एक दर्जन गांव के चारो तरफ पानी पहुंच गया है। जहां आज नाव के सहारे लोगों का आवागमन हो रहा है। जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महुला गढ़वाल बांध से अभ्भनपट्टी, रोशनगंज, साहडीह, सोनौरा, चक्की, इस्माइलपुर में नाव चलाई जा रही है। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान तेज हो गई है। घाघरा की कटान से 50 एकड़ जमीन तीन दिन में कट कर धारा में विलीन हो गई। गांगेपुर रिंग बांध दरक गया है। विभाग द्वारा डाला गया बोर्डर और गैबियान कैरेट के पास ही रिंग बांध में दरार पड़ गई है।

ये भी पढ़े : सवा तीन किलो अफीम के साथ पुलिस ने सात तस्कर को किया गिरफ्तार


If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles