जिसका जग में कोई नहीं, उसका श्रीराम करते हैं सहायता

रौनापार (आजमगढ़) : श्री सन्यासी संस्कृत महाविद्यालय रजादेपुर मठ पर आयोजित श्रीमद्भागवत गीता परायण महायज्ञ में गुरुवार को काशीधाम के संत स्वामी हयग्रीवाचार्य महराज ने कहा कि इस संसार में जब प्राणी का कोई सहायक नहीं होता है, तब प्रभु श्रीराम उसे अपने चरण में शरण देते हैं।

अहिल्या उद्धार की मार्मिक कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पति का श्राप मिलने पर अहिल्या पत्थर बन जाती हैं।

मुनि के श्राप के चलते आश्रम के पशु-पक्षी भी कुटिया छोड़कर चले जाते हैं।

उनके पुत्र सदानंद ज्ञानी होते हुए भी उन्हें त्याग देते हैं।

चारों तरफ से तिरस्कृत अहिल्या प्रभु की चरणों में अपना ध्यान लगाकर उनके आने का वर्षों तक इंतजार करती हैं।

उन्हें उम्मीद थी कि एक बार श्रीराम मेरी कुटिया में जरूर आएंगे और मेरा उद्धार करेंगे।

महर्षि विश्वामित्र के साथ वन जाते समय भगवान राम अहिल्या की कुटिया पहुंचकर सब जानते हुए भी महर्षि पूछते हैं कि यह शिला कैसी है।

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