गांव में कई 15 की जान, फिर स्वास्थ्य भी विभाग नही कर रहा कोई इंतजाम

संक्षेप:

  • गांवों में पहुंच रहा है कोरोना
  • फिर भी सरकार अभी तक नही कर रही कोई व्यवस्था
  • खाली पड़े है स्वास्थ्य केंद्र

बरेली- इज्जतनगर के गांव करमपुर चौधरी में आठ साल पहले बना स्वास्थ्य उपकेंद्र कोरोना की विभीषिका के बीच लोगों को एक-एक कर मरते देखने के अलावा कुछ नहीं कर सका। पंचायत चुनाव के बाद बीमारी तेजी से फैली तो झोलाछाप से ही इलाज कराकर गांव के 15 लोग बेबस मौत का शिकार हो गए। गांव वालों के मुताबिक स्वास्थ्य उपकेंद्र के निर्माण पर सरकारी पैसा तो फूंक दिया गया लेकिन गांव के लोगों के काफी जोर लगाने के बावजूद अफसरों ने स्टाफ की तैनाती नहीं की।


करमपुर चौधरी में आठ साल पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया था। इसके निर्माण के तीन साल बाद इसी अस्पताल में तत्कालीन विधायक शहजिल इस्लाम ने एएनएम सेंटर का शुभारंभ किया था। गांव वाले कहते हैं कि एएनएम सेंटर के शुभारंभ से उनमें एक उम्मीद जगी थी कि उन्हें अब गांव में ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी लेकिन एक-एक साल बीतता गया, न अस्पताल में एक भी कर्मचारी की तैनाती हुई न कोई अफसर अस्पताल का हाल देखने आया। धीरे-धीरे अस्पताल की इमारत जर्जर हो गई। शौचालय और खिड़कियां भी टूट गईं। दरवाजे लटकर झूलने लगे हैं।


अस्पताल लोगों का इलाज नहीं कर पाया तो बकरी और कुत्तों ने उसे अपना डेरा बना लिया। गांव के लोगों ने भी अस्पताल के सामने गोबर और रेत डालनी शुरू कर दी। गांव वाले कहते हैं कि अस्पताल में स्टाफ न होने के कारण उन्हें भोजीपुरा ब्लॉक जाना पड़ता है। उन्होंने कई बार अफसरों से स्वास्थ्य उपकेंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती की मांग की लेकिन किसी ने नहीं सुना।

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