CWG 2018: देश की दो बेटियों ने जमाया सोने पर कब्जा

संक्षेप:

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की `गोल्ड मॉर्निंग`
  • भारत पदक तालिका में तीसरे नंबर पर आ
  • अब तक 6 गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज

ऑस्ट्रेलिया में चल रहे 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का सुनहरा सफर जारी है. आज देश की दो बेटियों ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. 69 किलोग्राम महिला वर्ग में वेटलिफ्टिंग पूनम यादव ने गोल्ड मेडल जीता.

वहीं महज 16 साल की शूटर मनु भाकर ने भी 10 मीटर एयरपिस्टल प्रतियोगिता में सोने पर निशाना लगाया. इसी इवेंट में हिना सिद्धू ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. राष्ट्रमंडल खेल में भारत की झोली में अब तक 6 गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल आ चुके हैं. 6 गोल्ड मेडल के साथ भारत पदक तालिका में तीसरे नंबर पर है.

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हरियाणा के झज्जर जिले की रहने वाली 16 वर्षीया मनु ने इस स्पर्धा के फाइनल में कुल 240.9 अंक हासिल किए और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. वहीं हीना ने 234 अंक हासिल कर रजत पदक जीता. मनु भाकर सिर्फ निशानेबाजी ही नहीं, बल्कि अन्य खेलों में भी माहिर हैं. वह मुक्केबाजी, टेनिस और स्केटिंग में भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं.

मनु ने इसी साल मेक्सिको के ग्वाडलहारा में हुई आईएसएसएफ विश्व कप की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता था. वह इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की सबसे युवा निशानेबाज बनीं.

मनु कभी भी खाली हाथ नहीं आई: मनु के पिता

अपनी बेटी की जीत से गौरवान्वित मनु के पिता राम किशन भाकेर ने कहा, "जीतने के बाद सब कहते हैं कि हमें उम्मीद थीए लेकिन सच कहूं तो मनु कभी भी किसी भी टूनार्मेंट से खाली हाथ नहीं आई. चाहे वोए नेशनल्स होए स्कूल का हो या कोई भी टूनार्मेंट हो. वो कभी भी खाली हाथ नहीं लौटी."

बनारस के छोटे से गांव से हैं पूनम, पिता ने खेल के लिए भैंसे बेचीं

वहीं पूनम की बात करें तो उन्होंने कुल 222 किलो का वजन उठाया. उन्होंने स्नैच में 100 किलो वजन उठाकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, वहीं क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 122 किलोग्राम वजन उठाकर बेहतरीन प्रदर्शन किया.

पूनम यादव बनारस से सटे दादूपुर गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता छोटे किसान हैं. ग़रीबी से लड़ते हुए पिता कैलाश यादव ने अपने सात बच्चों को पाला पोसा. पूनम के खेल के लिए वो अपनी चार भैसें बेच चुके हैं. पूनम के पिता का कहना है कि लोग अपने बेटों के लिए जितना नहीं करते मैंने बेटियों के लिए किया है.

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