गंदगी पर बरेली के नगर आयुक्त के खिलाफ कोर्ट ने जारी किया वारंट

संक्षेप:

  • बरेली में गंदगी पर नगर आयुक्त के खिलाफ वारंट
  • कोर्ट ने सुनावाई करते हुए जारी किया वारंट
  • मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी

बरेलीः कोर्ट ने शहर में गंदगी से निपटने के उपाय नहीं किए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए नगर आयुक्त के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई को होगी।

सीजेएम कोर्ट में इस मामले की शिकायत जागर कल्याण समिति की तरफ से 15 साल पहले अर्जी देकर की गई थी। इसमें समिति के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि शहर में निकलने वाले जल को शुद्ध करने के लिए संयंत्र नहीं लगाए गए हैं, जिससे रामगंगा दूषित हो रही है। शहर में चारों तरफ गंदगी बिखरी हुई है।

नगर निगम के कूड़ेदान समय पर खाली नहीं किए जाते। कूड़े के ढेर में आग लगा दी जाती है, जिससे सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली हानिकारक गैस निकलती हैं। बारिश में जलभराव से सुभाषनगर, संजय नगर और जगतपुर जैसे इलाके प्रभावित होते हैं। तब कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर 23 जनवरी 2004 को नालों की सफाई व उनकी मरम्मत, कूड़े के ढेरों का उठान, जलभराव से छुटकारा दिलाने और जल संशोधन यंत्र लगाने के निर्देश नगर निगम को दिए थे।

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मत का हवाला देकर उल्लेख किया कि कोर्ट नगर निगम के अधिकारियों से उनके अनिवार्य क‌र्त्तव्यों का पालन कराने के लिए सक्षम है। अवहेलना की स्थिति में 188 आइपीसी के तहत दंडित भी किया जा सकता है। 12 जुलाई 2005 को तत्कालीन सीजेएम राजभान सिंह ने मुद्दई की हैसियत से पैरवी करते हुए एसीजेएम प्रथम की कोर्ट से नगर आयुक्त को तलब कर दंडित करने की मांग की थी।

जिस पर कोर्ट ने नगर आयुक्त को तलब कर लिया था। नगर निगम इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले आया, जो 9 सितंबर 2016 को खारिज हो गया था। मेयर उमेश गौतम ने बताया कि पहले और अब की सफाई व्यवस्था में काफी अंतर है। फिर भी यदि कोर्ट ने कोई आदेश दिया है तो उसका पालन किया जाएगा। विधिक प्रक्रिया के तहत जवाब दाखिल किया जाएगा।

 

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