अंग्रेजों ने बरेली के जिस पेड़ के नीचे दी थी 257 क्रांतिकारियों को फांसी, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

संक्षेप:

विरासत वृक्षों की एक कॉफी टेबल बुक भी शासन स्तर पर तैयार की जा रही है। इसके जरिए पर्यटन को भी बढ़ावा देने की कोशिश है। बरेली में चयनित वृक्षों में सात बरगद, 16 पीपल, एक नीम व एक गुलर का वृक्ष शामिल हैं। जिन्हें संरक्षित किया गया है।

बरेली: उत्तर प्रदेश में विरासत वृक्षों को सहेजने के लिए उनका चयन किया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की तकनीकी समिति ने बरेली के 25 वृक्षों को हरी झंडी दी है।

विरासत वृक्षों की एक कॉफी टेबल बुक भी शासन स्तर पर तैयार की जा रही है। इसके जरिए पर्यटन को भी बढ़ावा देने की कोशिश है। बरेली में चयनित वृक्षों में सात बरगद, 16 पीपल, एक नीम व एक गुलर का वृक्ष शामिल हैं। जिन्हें संरक्षित किया गया है।

कार्यालय परिसर मंडल आयुक्त बरेली में बरगद का पेड़ 130 वर्ष पुराना हैं। इस पेड़ में अग्रेजों के शासनकाल में 257 क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। क्रांति की अमिट छाप को सहेजे इस बरगद की हर शाखा इसकी गवाह है। यही नहीं देशभक्तों के लिए यह पेड़ किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है। इस पेड़ को अब हेरिटेज के रूप में संरक्षित किए जाने के लिए चिन्हित किया गया है।

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पेड़ों के संरक्षण करने से जहां पर्यावरण को फायदा होगा। वहीं ये पेड़ छायादार होने से गर्मी में लोगों को भी सहूलियत होगी। देखा गया है कि जहां पेड़ होते हैं। वहां पर गर्मी के दौरान तापमान कम होता है। पेड़ों की वजह से न सिर्फ मिट्टी का कटान रूकता है बल्कि वातावरण के नजरिए से कई तरह के लाभ पेड़ों से होते हैं। पेड़ों के तेजी से बढ़ते कटान की भी यह योजना भरपाई करेगी। 

एक नजर महत्व पर...

विरासत वृक्ष के रूप में चयन का आधार - क्रांतिकारियों को दी गई थी फांसी

वृक्ष की गोलाई मीटर में - 4.60

वृक्ष की अनुमानित आयु - 130 वर्ष

डीएफओ भारत लाल का कहना है कि जिले में विरासत वृक्षों के लिए कुल 32 पौधे चिन्हित किए गए थे। जिनमें शासन से 25 वृक्षों को हरी झंडी मिली है। इन पेड़ों को विरासत वृक्षों के रूप में संरक्षित किया जाना है।

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