13 एफआईआर दर्ज करने के बाद एसटीएफ ने तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के बाद अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है

भोपाल. एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने कहा कि व्यापमं घोटाले की पेंडिंग शिकायतों की जांच के दौरान व्यापमं और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस देकर पूछताछ की गई है. व्यापमं के पूर्व नियंत्रक सुधीर सिंह भदौरिया से तीन बार पूछताछ की गई. सुधीर सिंह भदौरिया ने आरोपी छात्रों के परीक्षा देने के मामले में परीक्षा केंद्र प्रभारी, पर्यवेक्षक को दोषी बताया है. वहीं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के तत्कालीन संचालकों एसएस कुशवाह, डॉ. एनएम श्रीवास्तव और डॉ. एससी तिवारी ने दस्तावेजों की जांच में चूक को निचले स्टाफ की गलती बताई है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर केस से जुड़े अफसरों को पूछताछ के लिए फिर से बुलाया जाएगा. सबूत जुटाए जा रहे हैं पूछताछ में मिली जानकारी की जांच की जा रही है. जिन अधिकारियों पर संदेह है, उनके खिलाफ सबूत भी जुटाए जा रहे हैं. सबूतों के आधार पर जिनकी भूमिका घोटाले में सामने आएगी, उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. सिर्फ पेंडिंग शिकायतों की जांच कर रही एसटीएफएसटीएफ की टीम सिर्फ पेंडिंग शिकायतों की जांच कर रही है. एसटीएफ के 20 अधिकारी और कर्मचारी की टीम एक महीने से पेंडिंग पड़ी 197 शिकायतों की जांच कर रही है. इनमें से 100 शिकायतों को चिह्नित कर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है. अब तक एसटीएफ ने 13 एफआईआर दर्ज की हैं. इन एफआईआर में 12 एफआईआर पीएमटी परीक्षा से जुड़ी हैं, जबकि एक एफआईआर आरक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर है. पीएमटी परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े को लेकर व्यापमं और डीएमई के तत्कालीन अफसरों पर शिकंजा कसा जा रहा है. सीबीआई की जांच में दखल नहीं  एसटीएफ की टीम सिर्फ पेंडिंग शिकायतों या फिर आने वाली नई शिकायतों पर जांच करेगी. एसटीएफ के अधिकारी सीबीआई की जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं. 2015 में एसटीएफ से व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ली थी. एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने कहा कि तमाम पेंडिंग शिकायतों की जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का सिलसिला जारी है. इस घोटाले में जो भी आरोपी बच गए थे उन पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि जिन मामलों में अभी तक एफआईआर दर्ज की गई उनके कनेक्शन की जांच तत्कालीन अफसरों से की जा रही है. पता लगाया जा रहा है कि उन मामलों में जिन आरोपियों को छोड़ा गया या फिर उन्हें आरोपी ही नहीं बनाया गया उसमें अफसरों की कहां तक और कितनी भूमिका थी.ये भी पढ़ेंः देश के हालात पर होगा संघ का मंथन, ये रहेगा बैठक का एजेंडा।

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