बघेल सरकार की नई रेत नीति को हाई कोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

संक्षेप:

  • छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की नई रेत नीति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है.
  • बिलासपुर हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई हुई. 
  • मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है. 

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की नई रेत नीति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। बिलासपुर हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। याचिकाकर्ता ने राज्य शासन द्वारा बोली के लिए निर्धारित न्यूनतम दर से अधिक दर पर निविदा भरकर शराब लॉबी द्वारा सुनियोजित तरीके से रेत घाटों पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया है।

बिलासपुर निवासी अजय गोपाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य शासन की नई रेत नीति को चुनौती देते हुए कहा कि राज्य शासन ने प्रत्येक जिले के खदानों में सीलिंग प्राइस पूर्व से ही निर्धारित कर दिया गया था। रेत नीति के अंतर्गत इस बार रिवर्स ऑक्शन पद्घति से खदानों की नीलामी की जा रही है । उक्त पद्घति के तहत जिला समिति द्वारा सीलिंग प्राइस निर्धारित की जाती है। इसमें लदान ,खुदाई सहित अन्य खर्च को जोड़ा जाना है। ऑक्शन प्रक्रिया में निर्धारित मापदंडों का हवाला देते हुए कहा है कि जो बोलीदार कम से कम बोली लगाएगा और निविदा भरेगा उसको ठेका दिया जाता है । किंतु शर्तों के अनुसार सीलिंग प्राइस से 50 फीसदी से कम की बोली स्वीकार नहीं की जाएगी । अगर एक से ज्यादा 50 प्रतिशत के बोलीदार है तो लॉटरी सिस्टम से ड्रा निकाला जाएगा। याचिकाकर्ता ने न्यूनतम बोली के तय मापदंड को चुनौती दी है । याचिका के अनुसार 50 फीसदी से भी कम बोली आ सकती थी किंतु रेत माफियाओं ने समूह बनाकर शराब ठेके की तर्ज पर एक-एक खदानों के लिए दर्जनों की संख्या में निविदा फार्म भरा और ठेका हथिया लिया । याचिकाकर्ता ने कहा है कि रेत ठेकेदारों द्वारा अधिकतम बोली पर रेत खदान लेने से बाजार में रेत ठेकेदारों दारा मन माफिक दाम वसूला जाएगा। इससे सरकारी योजनाओं पर भी विपरीत असर पड़ेगा । सरकारी नीति में रेत की बाजार मूल्य का भी निर्धारण नहीं किया गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्रन व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच में हुई । मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है।

जिले के 18 रेत घाटों से रेत उत्खनन के लिए ठेके पर देने जिला प्रशासन ने नौ समूह बनाया था । ए से लेकर आई तक समूह बनाकर किसी समूह में एक तो किसी में दो घाटों को शामिल किया है। सबसे ज्यादा छह रेत घाट मस्तूरी ब्लॉक में हैं। इन घाटों को ठेके पर देने के लिए तीन समूह बनाए हैं। प्रत्येक समूह में दो-दो घाटों को रखा गया है।

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