बिहार में ओवैसी की AIMIM ने खोला खाता, सीमांचल के किशनगंज में BJP को दी मात

संक्षेप:

  • असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन ने अब बिहार विधानसभा में एंट्री मार ली है.
  • बिहार के किशनगंज सीट पर उनकी पार्टी के उम्मीदवार कमरुल होदा (Kamrul Huda) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की है.
  • उन्होंने बीजेपी की प्रत्याशी स्वीटी सिंह को मात दे दी है.

किशनगंज: आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र विधानसभा (Andhra Pradesh and Maharashtra Assembly) में एंट्री मारने के बाद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) ने अब बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में एंट्री मार ली है. बिहार के किशनगंज सीट पर उनकी पार्टी के उम्मीदवार कमरुल होदा (Kamrul Huda) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी अनुमानों को खारिज कर दिया और बीजेपी की प्रत्याशी स्वीटी सिंह को मात दे दी है. जाहिर है यह सीमांचल (Seemanchal) की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत हैं.

लोकसभा चुनाव में ही मिल गए थे संकेत

लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी लहर में भी AIMIM ने किशनगंज लोकसभा क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया था. उस वक्त ही ओवैसी की पार्टी ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वो सीमांचल की राजनीति में प्रवेश करने जा रही है और आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र के बाद बिहार विधानसभा में भी बैठने जा रही है.

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जेडीयू पर भारी पड़ा था AIMIM

दरअसल सिर्फ यही एक सीट ऐसी रही जहां लड़ाई आमने-सामने की नहीं थी और कांग्रेस के मो. जावेद, जेडीयू के सैय्यद महमूद अशरफ और एआईएमआईएम के अख्तरुल इमान के बीच कड़ा मुकाबला रहा था. यही नहीं एक विधानसभा क्षेत्र अमौर में तो इसे जेडीयू से भी अधिक वोट आया था.

26 प्रतिशत मिला था वोट

दिलचस्प यह था कि एआईएमआईएम को यहां 2 लाख 95 हजार 29 वोट आए जो कुल वोट का 26.78 प्रतिशत था. जबकि, कांग्रेस को 3 लाख 67 हजार 17 वोट आया जो 33.32 प्रतिशत था और जेडीयू को 3 लाख 32 हजार 551 वोट आया, जो कुल वोट का 30.19 फीसदी रहा.

यहां मिली थी AIMIM को बढ़त

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी ओवैसी की पार्टी को कोचाधामन में लीड मिली थी. उनके उम्मीदवार को 6824, जेडीयू को 38,721 और कांग्रेस को 36,984 वोट मिले थे. इसी तरह बहादुरगंज में भी एआईएमआईएम को 67,625, जेडीयू को 52,486 और कांग्रेस को 44,492 वोट मिले थे.

2015 में 6 सीटों पर लड़े थे चुनाव

बता दें कि वर्ष 2015 में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन उनकी पार्टी के सभी छह उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. ओवैसी ने पहले मुस्लिम प्रभाव वाली सीमांचल की सभी 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, लेकिन बीजेपी से मिलीभगत के आरोपों के बीच उन्होंने महज छह उम्मीदवार ही उतारे थे.

बदल जाएगी सीमांचल की सियासत

बहरहाल बिहार विधानसभा में अब एआईएआईएम की पार्टी की एंट्री हो गई है और इसका असर सीमांचल की राजनीति पर साफ देखा जाएगा. देखना दिलचस्प होगा कि मुस्लिम वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश करती रही आरजेडी और जेडीयू के लिए AIMIM की एंट्री कितना नुकसान पहुंचाती है.

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