शर्मनाक: बिहार में बाढ़ पीड़ित चूहा खाने को मजबूर, नहीं मिल रहा सरकारी अनाज

संक्षेप:

  • बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आयी है.
  • कटिहार में सरकारी मदद न मिलने से लाचार कई परिवार चूहा खाकर अपनी जान बचाने को मजबूर हैं.
  • बाढ़ ने फिर से ऐसे कई परिवारों को चूहा खाने पर मजबूर कर दिया है.

कटिहार: बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आयी है. कटिहार में सरकारी मदद न मिलने से लाचार कई परिवार चूहा खाकर अपनी जान बचाने को मजबूर हैं. एक दौर था जब समुदाय विशेष के लोग चूहा खा कर गुजारा करते थे मगर सरकार के कल्याणकारी योजना ने इन लोगों की जीवन शैली में बड़ा बदलाव लाया था. लेकिन बाढ़ ने फिर से ऐसे कई परिवारों को चूहा खाने पर मजबूर कर दिया है. कटिहार के कदवा प्रखंड के डांगी टोला की इस तस्वीर पर प्रशासन चाहे जो भी सफाई दे स्थानीय विधायक शकील अहमद खान इससे इंसानियत के लिए शर्मशार बता रहे हैं.

खाने में चूड़ा नहीं तो चूहा ही सही

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बाढ़ पीड़ित ताला मुरमुर ने बताया कि राहत के नाम पर अब तक चूड़ा मिला तो क्या करें साहब. पूरे परिवार को भूख मिटाने के लिए चूहे से ही गुजारा करना पड़ रहा है. कटिहार कदवा प्रखंड के डांगी टोला गांव के कई घर बाढ़ में डूब गए हैं. घर डूबने के बाद परिवार के लिए रसद जुटाने की जिम्मेदारी दादा और पोते पर आ टिकी है. उम्मीद थी की राहत के नाम पर कुछ रसद मिलेगी मगर खाली हाथ लौटने से तो अच्छा है की फिर से मजबूरी में ही सही कुछ चूहा मार कर ले चलें ताकि परिवार के अन्य लोगों को भोजन के नाम पर पेट भरा जा सके.

300 से ज्यादा परिवार हैं फंसे

बाढ़ से डांगी टोला में लगभग 200- 300 परिवार बुरी तरह से फंस गये हैं इसीलिए कभी चूहा खाने से तौबा कर चुका यह समाज अब एक बार फिर चूहा खाने के लिए बेबस है. इस सवाल के जवाब पर बीडीओ राकेश गुप्ता ने चूहा खाने की जानकारी अब तक उनको नहीं होने की बात कही लेकिन स्थानीय विधायक शकील अहमद खान इसे इंसानियत के लिए शर्मसार घटना बताते हुए बाढ़ पूर्व तैयारी को लेकर प्रशासन पूरी तरह फैल होने का आरोप लगाते हुए जल्द कदवा को बाढ़ ग्रसित क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं.

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