पटना हाईकोर्ट के शताब्दी भवन का हुआ उद्घाटन, जानिए जस्टिस ने क्यों किया दरभंगा महाराज केस का जिक्र?

संक्षेप:

जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने बताया कि 3 फरवरी, 1916 को पटना हाईकोर्ट के उद्घाटन समारोह में तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग ने नए हाईकोर्ट भवन की भव्यता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि ये भवन अहम फैसलों का गवाह बनेगा।

दरभंगा। बिहार के लिए शनिवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा जब पटना हाईकोर्ट के शताब्दी भवन का भव्य उद्घाटन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने इस नए भवन का उद्घाटन किया।

इस मौके पर जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने पटना हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने दरभंगा महाराज केस फैसले का भी जिक्र किया, जिसके बाद संविधान का पहला संशोधन हुआ था।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने बताया कि 3 फरवरी, 1916 को पटना हाईकोर्ट के उद्घाटन समारोह में तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग ने नए हाईकोर्ट भवन की भव्यता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि ये भवन अहम फैसलों का गवाह बनेगा। 1 मार्च, 1916 को हाईकोर्ट में कार्यवाही शुरू हुई, जिसके बाद कोर्ट से कई ऐसे फैसले हुए जिन्होंने देश और संविधान को नई दिशा देने में सहयोग किया। संविधान में पहले संशोधन का कारण पटना हाईकोर्ट का ही एक ऐतिहासिक फैसला था।

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पटना हाईकोर्ट ने फरवरी, 1951 में दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह Vs बिहार सरकार के केस में बिहार भूमि सुधार कानून को असंवैधानिक घोषित किया था। इस फैसले में जमींदारों की जमीन राज्य में शामिल किए जाने को भूमि मालिकों के मौलिक अधिकार का हनन माना गया। नतीजा ये हुआ कि भूमि सुधार कानून प्रभावहीन हो गए। तत्कालीन बिहार सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही थी, इसी बीच केंद्र सरकार के वकीलों ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को सही बताते हुए केंद्र को सलाह दी कि खामियां नए संविधान में ही हैं। जब तक भूमि सुधार प्रक्रियाओं को अहम मानते हुए उन्हें मौलिक अधिकारों के विशेष प्रावधान के दायरे से बाहर नहीं किया जाएगा, तब तक पटना हाईकोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है।

इसी के बाद तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने कॉन्स्टिट्यूशन फर्स्ट अमेंडमेंट एक्ट, 1951 को संसद में पेश किया। इस दौरान संविधान के अनुच्छेद 31 में प्रोविजन (क) और (ख) जोड़ा गया और 18 जून 1951 को संविधान में पहला संशोधन किया। इसी संशोधन में 9वीं अनुसूची भी डाली गई, जिसके तहत भूमि सुधार कानून को प्राथमिकता दी गई।

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