दो बहनों से रेप और हत्या के मामले में आरोपी को फांसी की सजा, दाढ़ी के बाल से हुई थी पहचान

संक्षेप:

  • दाढ़ी के बाल ने दिलाई सजा-ए-मौत
  • पीड़ित मां को केस वापस लेने के लिए ऑफर किए थे 20 लाख
  • 3 और 13 साल की बच्चियों की रेप के बाद की गई थी हत्या

देहरादून: नाबालिग सगी बहनों की रेप के बाद हत्या मामले में आरोपी परवान सिंह को विशेष न्यायाधीश पोक्सो रमा पांडेय की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. यह पहला मौका है जब देहरादून की पोक्सो कोर्ट ने किसी आरोपी को सजा-ए-मौत सुनाई हो.

आपको बता दें कि 2017 में आरोपी ने 3 और 13 साल की बच्चियों की रेप के बाद उनकी गलाघोंट कर हत्या कर दी थी. ऋषिकेश के श्यामपुर चौक में जुलाई 2017  में आरोपी ने घर में घुसकर नाबालिग सगी बहनों को अपनी हवस का शिकार बनाया था.

इस मामले में पुलिस को सबसे अहम सबूत के रूप में आरोपी की दाढ़ी के बाल मिले थे. जिनको 13 साल मासूम ने मरते वक्त छटपटाहट में पकड़ा था. इन बालों से आरोपी परवान सिंह का डीएनए मिलान किया गया. अधिवक्ता भरत सिंह नेगी का कहना है कि अदालत ने आरोपी के दाढ़ी के बालों को ही सबसे अहम सबूत माना था.

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मीडिया से डीजीसी पोक्सो कोर्ट के अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने कहना है कि ऐसे जघन्य अपराधों से देवभूमि कलंकित हुई है. इस मामले में कोर्ट द्वारा ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी. उनका कहना है कि एक साल के कम समय में इस मामले में आरोपी को सजा सुनाई गई है. यह पहला मौका है जब देहरादून की पोक्सो कोर्ट ने किसी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई हो. उन्होंने बताया कि कोर्ट ने बच्चियों की मां के पुनर्वास के लिए निर्भया फंड से जिलाधिकारी को एक लाख रुपए देने का आदेश सुनाया है.

वहीं बच्चियों की मां का कहना है कि वह कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट है. उनका कहना है कि आरोपी पक्ष की ओर से उन्हें केस वापस लेने का दबाव भी बनाया गया था. जिसके लिए उन्हें 20 लाख रुपए का लालच भी दिया गया था. उन्होंने बताया कि उनके रहने-खाने का भी ठिकाना नहीं है. उन्हें अपनी मासूम बच्चियों के साथ हुए इस घिनौने अपराध के लिए न्याय चाहिए था. जिसमें उन्हें सब की मदद मिली है. उनका कहना है कि किसी के भी बच्चों के साथ दोबारा ऐसी घटना ना घटे.  

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