केदारनाथ के पास फिर बनी खतरनाक बर्फीली झील, वैज्ञानिकों ने जताई नई त्रासदी की आशंका

संक्षेप:

  • उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के पास एक बर्फीली झील बन जाने के कारण अधिकारी और विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं.
  • इस झील के देखे जाने के बाद 2013 की भयानक त्रासदी की यादें ताजा हो गई हैं.
  • उस समय भी इसी तरह की एक बर्फीली झील `चोराबाड़ी` का निर्माण हो गया था.

देहरादून: उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के पास एक बर्फीली झील बन जाने के कारण अधिकारी और विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं. यह झील केदारनाथ धाम से कुछ ही दूरी पर है. इस झील के देखे जाने के बाद 2013 की भयानक त्रासदी की यादें ताजा हो गई हैं. उस समय भी इसी तरह की एक बर्फीली झील `चोराबाड़ी` का निर्माण हो गया था. इसी झील में एकाएक उफान आने के कारण भारी मात्रा में पानी केदार घाटी में फैल गया था. यह इलाका रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है.

क्या कहते हैं डीएम

नई बर्फीली झील मिलने पर जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि उन्होंने कुछ तस्वीरें वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के साथ साझा की हैं. वाडिया इंस्टीट्यूट से अगले हफ्ते तक विशेषज्ञों की एक टीम आने की संभावना है. हालांकि उन्होंने कहा कि यह झील प्राकृतिक तौर पर बनी है.

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विशेषज्ञों में दो मत

इस मामले पर डॉ. प्रदीप भारद्वाज का कहना है कि यह बर्फीली झील छह साल पहले तबाही मचाने वाली झील जैसी ही दिख रही है. वहीं, हिमालयी ग्लेशियरों के विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल का कहना है कि यह झील उस तरह की नहीं है. उनके मुताबिक चोराबाड़ी जैसी झील का बनना अब संभव नहीं है क्योंकि यह 2013 में पूरी तरह से नष्ट हो गई थी. अभी जो बर्फीली झील दिखी है वैसी झीलों का निर्माण प्राकृतिक तौर पर होता रहता है. यह कुछ समय तक दिखती हैं और फिर गायब हो जाती है. इस तरह की सभी झीलें खतरनाक नहीं होती हैं.

गौरतलब है कि 2013 में उत्तराखंड में आई आपदा में 5000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. वरिष्ठ अधिकारी संजय गुंजियाल ने भी इसे खतरनाक नहीं माना है.

 

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