आम भक्तों के लिए आज खुला भगवान केदारनाथ का कपाट, हर हर महादेव के जयकारे से गूंजा पूरा धाम

संक्षेप:

  • बाबा केदार के धाम को मंदिर समिति द्वारा गेंदा और अन्य प्रकार के 15 कुंतल फूलों से सजाया गया है
  • आज ब्रह्मवेला में प्रात: 5 बजकर 35 मिनट पर भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए
  • इस दौरान धाम जय केदार के जयकारों से गूंज उठा

भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित भगवान शिव का यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च माना जाता है. आज ब्रह्मवेला में प्रात: 5 बजकर 35 मिनट पर भगवान केदारनाथ के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खुल गए. इस दौरान धाम जय केदार के जयकारों से गूंज उठा.
बता दें कि बाबा केदार के धाम को मंदिर समिति द्वारा गेंदा और अन्य प्रकार के 15 कुंतल फूलों से सजाया गया है.

मालूम हो कि इससे पहले 6 मई को कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत शीतकालीन गद्दीस्थल से भगवान श्री केदारनाथजी की चल विग्रह पंचमुखी मूर्ति ने प्रस्थान किया था. चल विग्रह मूर्ति को विधिवत स्नान कराया गया था. स्नान कराने के बाद मूर्ति को डोली में विराजमान करके फूल मालाओं से सजाया गया था. इसके बाद पुजारियों द्वारा केदार लिंग की विधिवत पूजा-अर्चना की गई.

तत्पश्चात हर-हर महादेव और जय केदार के जयकारों के साथ डोली ने प्रस्थान किया. 7 मई को डोली गौरीकुंड में विश्राम करते हुए 8 मई को केदारनाथ पहुंची. आज 9 मई को ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खोल दिए गए. बदरीनाथ और केदारनाथ के बारे में कथा है कि शीतकाल में जब मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं तो मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी देवताओं की रहती है यानी इस समय देवतागण भगवान बदरीनाथ और केदारनाथ की पूजा करते हैं. ऐसी भी बातें कई बार सुनने में आती है कि मंदिर के बंद कपाट के अंदर से घंटियों की आवाजें सुनाई देती हैं.

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शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद होने के समय अखंड दीप को जलाकर रख दिया जाता है. ग्रीष्म ऋतु आने पर जब कपाट खुलता है तो वह ज्योति जलती हुई मिलती है. इस दिव्यज्योति का दर्शन बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है. मंदिर के कपाट खुलने पर इस दिव्यज्योति के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. केदारनाथ मंदिर के पीछे स्थित इस कुंड में केदारनाथ के अभिषेक का जल रहता है. कहा जाता है कि यह जल अमृत तुल्‍य है. यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु इस अमृतमयी जल को पीते हैं. मान्यता है यह भी है कि अमृत कुंड के जल से लोगों की त्‍वचा संबंधी बीमारियां भी दूर हो जाती हैं. सनातन धर्म में अमृत कुंड के जल को गंगा जल जैसा ही पावन बताया गया है.

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