जानिए उत्तराखंड में सात साल बाद क्यों आई जल प्रलय और चमोली में क्यों टूटा ग्लेशियर?

संक्षेप:

उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे वहां चल रहे पावर प्रोजेक्ट और डैम तबाह हो गए। लेकिन हर किसी के मन में एक सवाल है कि आखिरी ऐसा क्या हुआ जिससे ये हादसा हुआ? अभी तक किसी के पास इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं है कि ये क्यों हुआ है.

देहरादून: उत्तराखंड के चमोली में रविवार को ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियां उफान पर आ गईं। इससे वहां चल रहे पावर प्रोजेक्ट और डैम तबाह हो गए। लेकिन हर किसी के मन में एक सवाल है कि आखिरी ऐसा क्या हुआ जिससे ये हादसा हुआ? अभी तक किसी के पास इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं है कि ये क्यों हुआ है.

लेकिन ग्लेशियरों पर शोध करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालय के इस हिस्से में ही एक हज़ार से अधिक ग्लेशियर हैं.... विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे प्रबल संभावना ये है कि तापमान बढ़ने की वजह से विशाल हिमखंड टूट गए हैं जिसकी वजह से उनसे भारी मात्रा में पानी निकला है... और इसी वजह से हिमस्खलन हुआ होगा और चट्टानें और मिट्टी टूटकर नीचे आई होगी.

वहीं एक 2019 में आई एक स्टडी की के मुताबिक 21वीं सदी यानी मौजूदा समय में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार पिछली सदी के आखिरी 25 साल के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है। यानी, ग्लेशियरों से बर्फ लगातार पिघलती जा रही है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियरों के निचले हिस्से को नुकसान हो रहा है।

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वहीं भारत सरकार के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ जियोलॉजी से रिटायर हुए डीपी डोभाल कहते हैं कि हम हिमखंड टूट को मृत बर्फ़ कहते हैं क्योंकि ये ग्लेशियरों के पीछे हटने के दौरान अलग हो जाती है और इसमें आमतौर पर चट्टानों और कंकड़ों का मलबा भी होता है. इसकी संभावना बहुत ज़्यादा है क्योंकि नीचे की तरफ़ भारी मात्रा में मलबा बहकर आया है...

कुछ विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि ऐसा हो सकता है कि ग्लेशियर की किसी झील में हिमस्खलन हुआ है जिसकी वजह से भारी मात्रा में पानी नीचे आया हो और बाढ़ आ गई हो. लेकिन उस क्षेत्र में अबतक ऐसी किसी ग्लेशियर झील के होने की जानकारी नहीं है. इस पर डॉक्टर डोभाल कहते हैं कि लेकिन इन दिनों ग्लेशियर में झील कितनी जल्दी और कब बन जाए ये भी नहीं कहा जा सकता...

एक संभावना ये भी जताई जा रही है कि हिमस्खलन और भूस्खलन होने की वजह से नदी कुछ समय से जाम हो गई होगी और जलस्तर बढ़ने की वजह से अचानक भारी मात्रा में पानी छूट गया होगा.... हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन की वजह से नदियों के जाम होने और अस्थायी झीले बनने के कई मामले सामने आए हैं. बाद में ये झीलें मानव बस्तियों, पुलों और हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को बहा ले जाती हैं....

आप को बता दें कि करीब 80 करोड़ लोग सिंचाई, बिजली और पीने के पानी के लिए हिमालय के ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दशकों में यह बंद हो जाएगा, क्योंकि हम बड़े पैमाने पर ग्लेशियर खो रहे हैं।

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