अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ कर सिंगर राहुल गुरुंग ने शुरू किया `औचित्य बैंड`

संक्षेप:

  • राहुल गुरुंग ने शुरू किया औचित्य बैंड
  • दो साल तक अकाउंटेंट के तौर पर किया काम
  • राहुल का हमेशा से ही था संगीत की तरफ झुकाव

 

देहरादून: देहरादून शहर भले ही मेट्रो शहरों के मुकाबले में काफी छोटा है लेकिन यहांआपको काफी हद तक मेट्रो लाइफ से जुड़ी चीज़े मिलेगी। बैंड कल्चर को वैसे तो बड़े शहरों से जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन देहरादून भी इस सब मे पीछे नहीं है। इसी को देखते हुए औचित्य बैंड (जिसका अर्थ है-उचित होना) को शुरू करने वाले राहुल गुरुंग से NYOOOZ ने खास बातचीत की। 

NYOOOZ: अपने बारे में कुछ बताएं,आपने इसकी शुरुआत कैसे की?

राहुल गुरुंग: शुरुआत थोड़ी कठिन थी। मेरे पिता,अंकल ,आंटी के इंतकाल के बाद मेरी मां ,दादी ने हमें संभाला, फिर मेरी बड़ी बहन और बड़े भाई सहारा बने। मैं दून इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ा हूं, उसके बाद उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से बीबीए किया। जिसके बाद दो साल तक अकाउंटेंट के तौर पर भी काम किया। तब मैं अर्णव के संपर्क में आया वो यहां देहरादून में सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाते हैं।वहां कुछ स्टेज शो किए,उसके बाद फिर से वही 9 से 6 की शिफ्ट। तभी उसी दौरान एक महिला जो दून में इवेंट्स एंव शो आयोजित करती है, आकर मुझसे कहा कि उन्होंने मुझे सुना है वो चाहती हैं कि मैं परफॉर्म करूं।बस वहीं से मुझे एहसास हुआ कि लोग मुझे सुनना चाहते हैं।

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NYOOOZ: गायकी में झुकाव आपको शुरू से था या ये सब अचानक से हुआ?

राहुल गुरुंग: मेरा हमेशा से संगीत की तरफ झुकाव था, मेरे पिता की ही तरह जैसे उन्होंने अपनी CRPF की जॉब छोड़ी। उन्होंने अपना ऑकेस्ट्रा बैंड स्टार्ट किया। नेपाली होते हुए भी वो अपने गढ़वाली पहाड़ी गानों के लिए मशहूर थे, उसी तरह मैने भी अकाउंटेंट की जॉब छोड़ी फिर अपना बैंड शुरू किया। वैसे छठी कक्षा से ही वाद्य यंत्रों की तरफ रुझाव था जैसे शुरू में बांसुरी। फिर कीज़ फिर गिटार इसी तरह सफर चलता रहा।

NYOOOZ: आपने "औचित्य" बैंड कब शुरू किया एंव आपका अब तक का सफर कैसा रहा है इस बैंड के साथ?

राहुल गुरुंग: अभी तक का सफर तो अद्भूत रहा है, यह बैंड मैंने 6 मार्च 2016 में शुरू किया था। दून में सोलो कलाकार बहुत है। यहां एक फेसबुक ग्रुप है Musicians नाम का। उस ग्रुप में लोग अपने पोस्ट दिया करते थे ,बैंड और गिटारिस्ट की जरूरत के लिए। मेरे ज्यादातर साथी उसी ग्रुप से आये है।अब तक का सफर भी साथ में गजब का रहा है।

NYOOOZ: आप मुख्यता किस शैली में गाते है, कुछ गाने जो आपने लिखे हो?

राहुल गुरुंग: मुझे व्यक्तिगत रूप से इंग्लिश जैज़ पसंद है पर देहरादून में बैंड कल्चर इतना अच्छा नहीं है। यहां लोग ज्यादातर कमर्शियल संगीत सुनना पसंद करते हैं। मैं जैज़ पसंद करता हूं,अपने खुद के गाने भी लिख रहा हूं।दून से बाहर निकल कर उनपर भी काम करूँगा। अभी नैनीताल ,दिल्ली और दून में ही स्टेज परफॉर्मेंस की है।

NYOOOZ: देहरादून में संगीत वातावरण कैसा है लोग यहां सिर्फ कमर्शियलस ही पसंद करते है, बैंड की तरफ कोई समर्थन लोगों का दून में ?

राहुल गुरुंग: दून में संगीतकारों के लिए एक अलग ही कम्युनिटी है। यहां समर्थन के लिए कदम तो उठाए जा चुके है जैसे "बिग बैंग थ्योरी" नाम की इवेंट कंपनी ऐसे संगीतकारों को आमंत्रित करती है की आप अपना ओरिजिनल संगीत गाये जैसे कि पहाड़ी ,जैज़ ना कि कमर्शियल।

NYOOOZ: आपका पसंदीदा कलाकार 90` के दशक का?

राहुल गुरुंग: इंडियन पॉप में तो बैक स्ट्रीट बोयज़,ब्रायन एडम्स जैसे कलाकार भारतीय में इंडियन ओसियन ,यूफोरिया जैसे बैंड।

NYOOOZ: देहरादून  में एक बैंड का मशहूर होना कितना आसान या कितना कठिन है?

राहुल गुरुंग: मेरे लिए यह इतना मुश्किल नही था,कुछ विशिष्ट ग्रुप जो इस तरह के बैंड्स को पसंद करते है ।जहाँ भी आप शो करते है,परफॉर्म करते है आपको इसके चाहने वाले वो लोग मिलेंगे। तो अगर आप अच्छे है और किस्मत आपके साथ है तो ये आपके लिए मुश्किल नहीं होगा।

NYOOOZ: आप पुराने 90 के दशक के संगीत,गानों में किस तरह भिन्नता पाते है? जैसे कि इंडियन पॉप में एंव जो आज का टीन एज है वह पुराने संगीत पर किस तरह से प्रतिक्रिया देता है?

राहुल गुरुंग: पुराना संगीत ,गाने आप अभी भी चला दीजिए, लोग इन्हें अभी भी उतना ही पसंद करते है। जैसे कि लकी अली मेरे पसंदीदा कलाकार उनका एक छोटा सा मैशअप भी बनाया है मैंने, उनके गाने लोग बहुत पसंद करते है। आज के समय में गाने सदाबहार नहीं है जैसे कुछ समय पहले मेरे दस बारह शोज़ में लोगों ने मुझसे `छन्ना मेरिया` की बहुत फरमाइश की, पर पुराना संगीत हमेशा ही सदाबहार रहेगा। रही बात टीन एज ग्रुप की तो इंडियन पॉप तो उन्हें भी पसंद आता है। पर इसकी किस्मों जैसे कंट्री म्यूजिक के बारे में ज्यादा विश्लेषण नहीं कर पाते सब।

NYOOOZ: संगीत के क्षेत्र में आने वाले नए लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे आप?

राहुल गुरुंग: मैं उन्हें कुछ बताना चाहूंगा कि अपने पहले स्टेज शो के बाद 2 महीने हम खाली थे। कोई काम नहीं था ऐसा बहुत बार आपके साथ भी होगा ,पर उसी खाली समय ने हमे बताया कि हमें क्या करना चाहिए क्या संगीत बनाए की हमें पहचान मिले? लोगों का इंतज़ार नहीं करें बल्कि कुछ ऐसा करें कि वो हमें हमारे संगीत को सुनें। बस अपने आप को पहचानिए अगर आप प्रतिभाशाली और किस्मत वाले हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।

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