3 तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली सायरा बीजेपी में हो सकती है शामिल

संक्षेप:

  • तीन तलाक के खिलाफ उठाई थी आवाज
  • बीजेपी में होगी शामिल!
  • जानिए कौन है सायरा बानो

देहरादून: तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के लिए मिसाल बनी काशीपुर की सायरा बानो जल्द ही बीजेपी में शामिल होने वाली हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने इस बारे में उनसे बात की है।

सायरा बानो को उत्तराखंड सरकार की ओर से दिए जाने वाले तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सायरा बनो ने तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका डाली थी। काफी लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया था और तीन तलाक की प्रथा को अवैध करार दिया था।

सायारो बनो ने बताया कि वो प्रदेश और देश की महिलाओं को लिए काम करना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो मोदी सरकार की नीतियों से खुश हैं। शुक्रवार को सायरा बानो अपने पिता इकबाल अहमद के साथ प्रदेश भाजपा कार्यालय गईं थीं। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष भट्ट व महामंत्री संगठन संजय कुमार से मुलाकात की। प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने सायरा बानो का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष ने इतिहास रचा है।

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वहीं सायरा बानो ने हलाला व बहु विवाह मामले में उच्चतम न्यायालय में विचार होने पर खुशी जाहिर की। साथ ही कहा कि वह भविष्य में भी महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेंगी। यदि बीजेपी उन्हें मौके देगी तो पार्टी में शामिल होकर महिला के सामाजिक तौर पर भी काम करेंगी।

सायरा इस समय मुरादाबाद के एक विश्वविद्यालय से एमबीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहीं हैं। सायरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उत्तराखंड में सामाजिक क्षेत्र में काम कर रही अन्य मुस्लिम महिलाओं का भी पार्टी का साथ मिल सकता है।

सायरा बानो की शादी साल 2002 में इलाहाबाद के रहने वाले वाले रिजवान अहमद से हुई थी। वह मूलतः उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं। अपनी याचिका में सायरा ने आरोप लगाया है कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान करते थे। उसके साथ मारपीट होती थी, उसे नशीली दवाएं दी जाती थीं, जिसके चलते उसकी तबीयत खराब होने लगी थी। सायरा की याचिका के मुताबिक अप्रैल 2015 में रिजवान ने उसे तीन तलाक देकर जबरदस्ती मायके भेज दिया और उससे रिश्ता तोड़ लिया।

अपनी याचिका में उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी चुनौती दी है। पर्सनल लॉ बोर्ड के एप्लीकेशन एक्ट की धारा 2 के तहत पुरुषों के बहुविवाह, तीन तलाक, निकाह, हलाला जैसी प्रथाओं को वैधता मिलती है। सायरा का कहना है कि उनके इतने सालों की शादी कुछ ही मिनटों में `तलाक तलाक तलाक` कहने से टूट गई। यह अन्याय है। ये कानून मुस्लिम महिलाओं को उनके कई अधिकारों से वंचित करती है।

अपनी याचिका में सायरा ने यह भी कहा कि भारत के अन्य समुदायों में बहुविवाह को समाप्त कर दिया गया है, इसे दंडनीय माना गया है, वहीं मुस्लिम समाज आज भी इसे मान्यता देता है। उनका मानना है कि ये प्रथाएं उस सोच को बढ़ावा देती है, जिसमें पुरुष महिलाओं को अपनी संपत्ति समझते हैं। उनका कहना है कि आज के प्रोग्रेसिव समाज में इन प्रथाओं के लिए स्थान नहीं होना चाहिए।

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