पढ़िए फिल्म `राम तेरी गंगा मैली` की हर्षिल घाटी और डाकघर से कनेक्शन की कहानी

संक्षेप:

  • हर्षिल घाटी है शैलानियों के आकर्षण का केंद्र
  • फिल्म राम तेरी गंगा मैली की हुई थी यहां शूटिंग
  • खूबसूरत नजारों ने मोह लिया था दर्शकों का मन

देहरादून: उत्तरकाशी का हर्षिल घाटी शैलानियों को हमेशा से ही अपनी खूबसूरत वादियों से आकर्षित करती रही है लेकिन हर्षिल में बने डाकघर की अपनी ही एक कहानी है।

80 के दशक में बनी `राम तेरी गंगा मैली` के कई सीन और गानों का फिल्मांकन यहां हुआ था। खास आकर्षण का केन्द्र उस जमाने में बने डाकघर का है जिसमें नायिका मंदाकनी (गंगा) अपने प्रेमी राजीव कपूर (नरेन) की सारी प्रेम कहानी इसके इर्द गिर्द फिल्माए गए थे। जिस कारण भारत-चीन सीमा में बना ये अंतिम डाकघर हर्षिल की खूबसूरत नजारों, झरनों, बर्फीले पहाड़ों की वजह से रातों रात सुर्खियाँ बटोरने लगा और हमेशा के लिए हर्षिल डाकघर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। तब से आज तक हर्षिल में जो भी पर्यटक आते हैं इस डाकघर के सामने फोटो खिंचवाना नहीं भूलते साथ ही राम तेरी गंगा मैली की यादें ताजा हो जाती है।

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जब `राम तेरी गंगा मैली` फ़िल्म रीलीज हुई तो मंदाकिनी की अदाकारी ने हर्षिल घाटी में दिए बोल्ड सीन से सिनेमा जगत में खलबली मचा दी साथ ही हर्षिल की खूबसूरत नजारों ने दर्शकों  का मन मोह लिया।

हर्षिल के स्थानीय लोग भी  इस फ़िल्म की सूटिंग की कहानी सुनाते हैं और इस डाकघर के बारे में भी बताते हैं जो भारत-चीन सीमा का अंतिम डाकघर है।

यहां के स्थानीय लोगों की मांग है कि ये डाकघर एक धरोहर है,  इसका संरक्षक जिला प्रशासन या सरकार द्वारा होना चाहिए ताकि इसका डेवलपमेंट किया जा सके और ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इसका दीदार कर सके ताकि ये धरोहर हमेशा जिन्दा रहे।

उत्तरकाशी की वादियां अक्सर पर्यटक को को अपने पास बुलाती हैं लेकिन हर्षिल की अगर बात हो तो गंगोत्री जाने वाले पर्यटक हर्षिल में पहुंचकर इसके नैसर्गिक सौंदर्य को जिंदगी भर नहीं भुला पाते हैं। चीन की सीमा से लगे हर्षिल गांव में अब भी बुनियादी सुविधाओं की बहुत आवश्यकता है।

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