हल्द्वानी लव जेहाद मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- माता-पिता के साथ रहेगी लड़की

संक्षेप:

  • हल्द्वानी के कथित लव जिहाद का मामला
  • दानिश की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
  • माता-पिता के साथ रहेगी लड़की

देहरादून: उत्तराखंड के हल्द्वानी के कथित लव जिहाद मामले में युवक मोहम्मद दानिश की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुवार को युवती को कोर्ट में पेश किया गया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने युवती से पूछा कि आप किसके साथ रहना चाहती हैं तो लड़की ने कहा कि मैं अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती हूं। उसके बाद कोर्ट ने कहा कि ये लड़की का अधिकार है कि वो किसके साथ रहना चाहती है। अगर लड़की अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है।

आपको बता दें कि दानिश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि दोनों पति-पत्नी हैं और उन्हें साथ रहने का अधिकार है। दानिश फिलहाल जेल में है। याचिका में कहा गया था कि लड़की के संवैधानिक अधिकारों क उल्लंघन हो रहा है। क्योंकि लड़की ने मुस्लिम धर्म अपनाकर उसके साथ निकाह किया है। ऐसे में उन दोनों को अधिकार है कि वह पति-पत्नी की तरह रहें लिहाजा लड़की को उसके पास रहने दिया जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने लड़की को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था।

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दानिश उत्तराखंड के हल्द्वानी का रहने वाला है। दानिश और युवती भीमताल से बीबीए कर रहे थे, जहां दोनों के बीच प्यार हो गया था। दानिश ने अपनी याचिका में कहा था कि दोनों का निकाह रजामंदी से हुआ था, लेकिन युवती के पिता ने उसके खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसके बाद उसे और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया।

याचिका में यह भी कहा गया था कि लड़की को उसकी मर्जी के बगैर उसके पिता के पास भेज दिया गया है। उसे पति के साथ रहने का अधिकार है। उसने कहा था कि पत्नी को उसके पिता के घर के बजाए उसके साथ रहने की इजाजत दी जाए। 

उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल मनोज गोरकेला ने कोर्ट से कहा था कि आरोपी ने 18 अप्रैल को युवती का अपहरण किया और अगले दिन गाजियाबाद में फर्जी तरीके से युवती का धर्मांतरण कर उससे शादी कर ली थी। उनका कहना था निकाहनामा फर्जी है और धर्म परिवर्तन से संबंधित दस्तावेज भी फर्जी हैं।

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