उत्तराखंड निकाय चुनाव: इस बार मतदाताओं के पास होगा NOTA का विकल्प

संक्षेप:

  • उत्तराखंड निकाय चुनाव
  • 18 नवंबर को होंगे मतदान
  • पहली बार नोटा का विकल्प

देहरादून: उत्तराखंड में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है. 18 नवंबर को मतदान होंगे और 20 को मतगणना होगी. वहीं इस बार मतदाताओं के पास NOTA (None of the above) का भी विकल्प होगा.

आपको बता दें राज्य में चौथी बार निकाय चुनाव होने जा रहे हैं. इससे पहले 2003, 2008 और 2013 में निकाय चुनाव हुए थे. इस बार का चुनाव अबतक हुए तीनों निकाय चुनाव से कुछ अलग होने जा रहे हैं. पहली बार मतदाताओं को नोटा का अधिकार दिया जा रहा है. 2003, 2008 और 2013 में हुए निकाय चुनाव में मतदाताओं को नोटा का विकल्प नहीं दिया गया था. लेकिन इस बार के चुनाव के दौरान मतदाताओं को नापसंद प्रत्याशी को नकारने का पूरा अधिकार दिया जा रहा है. इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने मतपत्रों में नोटा का विकल्प डालने के आदेश जारी किए हैं.

दरअसल, मतदाताओं को बूथों तक खींचने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग हर संभव प्रयास करता रहा है. नोटा का अधिकार देना भी इसी प्रयास में शामिल है. इसके जरिये वो लोग भी बूथों तक पहुंचेंगे जो सिस्टम और राजनीतिक दलों से नाराज हैं और किसी को भी पसंद नहीं करते हैं. वहीं, NOTA के जरिये सिस्टम और राजनेताओं को भी अब आइना दिखाया जा सकेगा.

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नोटा का मतलब नन ऑफ द एबव, यानि इनमें से कोई नहीं. 2015 से नोटा पूरे देश मे लागू हुआ था. भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में इनमें से कोई नहीं अर्थात `नोटा` बटन का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. अगर भ्रष्ट या नकारा होने के कारण वोटर किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देना चाहते हैं तो वह `नोटा` का बटन दबा सकते हैं.  
गौर हो कि, 15 अक्टूबर को राज्य चुनाव आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए बताया था कि 18 नवंबर को मतदान होंगे और 20 को मतगणना. उन्होंने ये भी बताया कि चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होंगे. राज्य चुनाव आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कि प्रदेश में महिला मतदाता 11,48027 जबकि पुरूष मतदाता 12,09913 हैं.

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