शहीद राजेंद्र सिंह पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक गांव, सीएम रावत ने दी श्रद्धांजलि

संक्षेप:

  • उत्तराखंड का एक और लाल हुआ शहीद
  • पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक गांव
  • मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दी श्रद्धांजलि

देहरादून: गुरुवार को आतंकियों और अलगाववादी समर्थकों की हिंसक भीड़ द्वारा किये गए पथराव में गंभीर रूप से घायल हुए पिथौरागढ़ के जवान राजेंद्र सिंह का श्रीनगर स्थित सेना के बेस अस्पताल में निधन हो गया.

शहीद राजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बड़ेनाकुंड पहुंच गया है. शहीद का पार्थिव शरीर आज दोपहर हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ आर्मी हेडक्वार्टर के हैलीपैड पर लाया गया. जहां सेना और प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उन्हे श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर सीएम ने कहा कि उत्तराखंड के जवान हर मोर्चे पर देश सेवा के लिए तत्पर हैं.

साथ ही सीएम ने पत्थरबाजों द्वारा किये गये हमले की निंदा भी की. पत्थरबाजों पर पैलेट गन चलाने में मानवाधिकार कार्यकर्ता कोर्ट तक पहुंच जाते हैं इसी का खामियाजा है कि आज प्रदेश ने अपने एक और लाल को खो दिया.आर्मी हैलीपेड से रवाना होकर शहीद का पार्थिव शरीर उनके गांव बड़ेनाकुंड लाया गया. शहीद के अंतिम दर्शन के लिए भारी तादात में हुजूम उमड़ा. शहीद राजेंद्र का शव जैसे ही उनके घर पहुंचा परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. घर का इकलौता बेटा खोने का गम उनकी आंखों में साफ दिख रहा हैं.

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राजेंद्र के परिजनों ने भी पत्थरबाजों द्वारा किये गये इस हमले की निंदा की है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को भी पत्थरबाजों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए, ताकि उनके बेटे की तरह और जवानों को भी अपनी जान से हाथ न धोना पड़े.

दरअसल, गुरुवार को आतंकियों और अलगाववादी समर्थकों की हिंसक भीड़ द्वारा किये गए पथराव में राजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये थे. श्रीनगर स्थित सेना के बेस अस्पताल में जवान ने अंतिम सांस ली. महज 24  की उम्र में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवान राजेंद्र सिंह बुंगला अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे.

वो अपने पीछे मां-बाप और तीन बहनों को छोड़ गए हैं. राजेंद्र अकेले ही अपने परिवार का जिम्मा संभालते थे. उनकी मौत की खबर के बाद से पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ है. 3 साल पहले ही राजेंद्र सेना में भर्ती हुए थे. वह वर्तमान में जाट रेजिमेंट में तैनात थे. 15 दिन पहले ही उसकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी. वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की.

जानकारी के मुताबिक सिपाही राजेंद्र सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों और कर्मचारियों के काफिले की सुरक्षा में तैनात थे. गुरुवार शाम 6 बजे जब ये काफिला अनंतनाग में टी जंक्शन पर पहुंचा तो वहां मौजूद पत्थरबाजों ने काफिले पर हमला शुरू कर दिया.  सिपाही राजेंद्र सिंह और उनके साथियों ने वाहन से उतरकर जब भीड़ को चेतावनी दी तो पथराव और तेज हो गया. इस दौरान पथराव में एक पत्थर राजेन्द्र सिंह के सर पर लगा और वो गंभीर रूप से जख्मी हो गए. श्रीनगर में सेना के 92 बेस अस्पताल में उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

कश्मीर में पत्थरबाजों के प्रति सरकार नरम रूख अपनाए हुए है और हजारों पत्थरबाजों के केस पूर्व में वापस ले चुकी है. वहीं, पत्थरबाजों के हौसले फिर से बुलंद हो गए हैं. भारतीय सैनिक चाहते तो पत्थरबाजों का मुकाबला गोलियों से कर सकते थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक जवानों के हाथ यूं ही बंधे रहेंगे और पत्थरबाजों के खिलाफ एक्शन आखिर कब लिया जाएगा?

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