धर्म के आधार पर उत्तराखंड की टीम चुनते थे वसीम जाफर और बुलाते थे मौलवी! आरोप लगने पर किया बड़ा खुलासा

संक्षेप:

संघ सचिव महिम वर्मा ने आरोप लगाए थे कि जाफर ने धर्म के आधार पर टीम में चयन करने की कोशिश की थी. आपको बता दें कि जाफर को जून 2020 में उत्तराखंड का कोच बनाया गया था. उन्होंने एक साल का करार किया था.

भारत के पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर ने उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन से मतभेद होने के चलते कोच पद से इस्तीफा देने के बाद प्रदेश संघ के सचिव द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है.

संघ सचिव महिम वर्मा (Mahim Verma) ने आरोप लगाए थे कि जाफर ने धर्म के आधार पर टीम में चयन करने की कोशिश की थी. आपको बता दें कि जाफर को जून 2020 में उत्तराखंड का कोच बनाया गया था. उन्होंने एक साल का करार किया था.

वसीम जाफर (Wasim Jaffer) के ऊपर मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के आरोप लगाए गए है. इसपर जाफर का कहना है कि इन आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची है. जाफर ने कहा, `जो कम्युनल एंगल लगाया जा रहा है वह बहुत दुखद है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि मैं इकबाल अब्दुल्ला (Iqbal Abdulla) का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता था, जोकि सरासर गलत है.` गौरतलब है कि जाफर ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और असोसिएशन के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये के चलते मंगलवार को कोच पद से इस्तीफा दे दिया था.

वसीम जाफर (Wasim Jaffer) ने कहा कि वे इकबाल अब्दुल्ला नहीं बल्कि जय बिस्टा (Jay Bista) को टीम का कप्तान बनाना चाहते थे लेकिन अन्य चयनकर्ताओं ने उन्हें अब्दुल्ला (Iqbal Abdulla) को कप्तान बनाने के लिए सुझाव दिया था. उन्होंने कहा, `मैं जय बिस्टा को कप्तान बनाना चाहता था, लेकिन रिजवान शमशाद और अन्य चयनकर्ताओं ने मुझे सुझाव दिया कि इकबाल को कप्तान बनाएं. वह सीनियर खिलाड़ी हैं, आईपीएल खेल चुका है और उम्र में भी बड़ा है. मैंने उनका सुझाव मान लिया.`

वसीम जाफर (Wasim Jaffer) ने कहा कि प्रैक्टिस सेशन के दौरान वे मौलवियों को लेकर नहीं आए थे. उन्होंने कहा, `बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी. मैं आपको बताना चाहता हूं कि जो भी मौलवी देहरादून में कैंप के दौरान दो या तीन जुमे को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था. हम रोज कमरे में ही नमाज पढ़ते थे लेकिन जुमे की नमाज मिलकर पढ़ते थे तो मैंने सोचा कि कोई इसके लिए आएगा तो अच्छा ही रहेगा. हमने नेट प्रैक्टिस के बाद पांच मिनट ड्रेसिंग रूम में नमाज पढ़ी. अगर यह सांप्रदायिक है तो मैं नमाज के वक्त के हिसाब से प्रैक्टिस का समय बदल सकता था, लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं.`

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