नक्शे से इस तरह उतर रहा भगवा रंग, ढह रहा है BJP का क़िला

संक्षेप:

  • झारखंड विधानसभा चुनाव में हार मिलते ही बीजेपी के हाथ से एक और राज्य निकल गया है.
  • बीते दो साल में एनडीए के हाथ से छिटकने वाला ये 7वां राज्य है.
  • दो साल पहले जब देश के ज़्यादातर राज्यों में भगवा परचम लहरा रहा था तो अमित शाह के मंसूबे सातवें आसमान पर थे.

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव में हार मिलते ही बीजेपी के हाथ से एक और राज्य निकल गया है. बीते दो साल में एनडीए के हाथ से छिटकने वाला ये 7वां राज्य है. दो साल पहले जब देश के ज़्यादातर राज्यों में भगवा परचम लहरा रहा था तो अमित शाह के मंसूबे सातवें आसमान पर थे. लेकिन दिसंबर 2017 से लेकर दिसंबर 2019 के बीच बीजेपी को एक के बाद एक कई झटके लगे. जोड़-तोड़ करके अगर कर्नाटक में बीजेपी फिर से सरकार नहीं बनाई होती, तो उसका प्रसार और कम हो जाता. इसी तरह बिहार में अगर नाटकीय तरीक़े से बीजेपी ने जेडीयू के साथ सरकार नहीं बनाई होती, तो इसकी हालत और कमज़ोर मालूम पड़ती.

बीजेपी अब गुजरात, उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत में सिमटकर रह गई है

मध्य भारत ने पूरी तरह बीजेपी को ख़ारिज़ कर दिया है. दक्षिण में कर्नाटक ने बीजेपी का झंडा फ़िलहाल पकड़ रखा है. 2017 में 72 फ़ीसदी आबादी वाले 75 फ़ीसदी भूभाग पर बीजेपी का कब्ज़ा था. 19 राज्यों में बीजेपी-एनडीए की सरकार थी. लेकिन इन दो सालों में बहुत पानी बह गया है. अब राड्यों की संख्या 19 से घटकर 16 हो गई है और पहले जहां 72 फ़ीसदी लोगों पर बीजेपी सरकार चलाती थी, अब ये आंकड़ा घटकर मात्र 42 फ़ीसदी रह गया है.

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देखिए इन दो वर्षों में क्या-क्या हुआ?

दो साल में काफी सिमट गई बीजेपी

• दिसंबर 2017 में एनडीए के पास 19 राज्य थे. एक साल के अंदर हुए चुनाव में बीजेपी को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा. तीनों राज्यों में सीधी टक्कर में कांग्रेस ने उसे मात दी.
• मार्च 2018 तक आंध्र प्रदेश में सब कुछ ठीक-ठाक था. उसके बाद टीडीपी ने बीजेपी से किनारा कर लिया. बीजेपी अलग-थलग पड़ गई. फिर 2019 में जब चुनाव हुआ तो बीजेपी कहीं की नहीं रह गई. राज्य में वाईएसआर कांग्रेस ने एकतरफ़ा जीत हासिल की और वहां उसकी सरकार बनी.
• जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने इतिहास बनाते हुए पहली बार पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. लेकिन, राज्य में तेज़ी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच जून 2018 में बीजेपी और पीडीपी ने अपना रिश्ता तोड़ लिया. इसके बाद यहां राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति शासन लगा. धारा 370 ख़त्म होने के बाद अब इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया है. जम्मू-कश्मीर में चुनाव होना बाक़ी है.
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• इसके बाद महाराष्ट्र-हरियाणा में चुनाव हुए. हरियाणा में बीजेपी ने जैसे-तैसे सरकार बना ली. लेकिन महाराष्ट्र हाथ से फ़िसल गया. ढाई दशक की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने बीजेपी से किनारा कर लिया. राज्य में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनी.
• इस सिलसिले में झारखंड सातवां राज्य है. प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया था, लेकिन जनता ने रघुबर दास को नकार दिया है. प्रदेश अब जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी की सरकार बनने की राह अब साफ़ दिख रहा है. ये तय हो गया है कि हेमंत सोरेन अब प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे.
• बीजेपी ने इस दौरान 7 राज्य गंवाए. लेकिन इसी दौरान कर्नाटक, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में सरकार बनाई. इनमें कर्नाटक बड़ा है. बाकी राज्य छोटे हैं. इसलिए अब 72% की जगह देश की 42% आबादी वाले राज्यों में ही एनडीए का शासन बचा है.
• कांग्रेस अपने बूते या गठबंधन के जरिए महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, पुड्‌डुचेरी में सत्ता में है. झारखंड में सरकार बनने पर उसकी 7 राज्यों में सरकार होगी.
• दिल्ली में आम आदमी पार्टी, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस, ओडिशा में बीजेडी और तेलंगाना में टीआरएस सत्ता में है.
• तमिलनाडु में इस वक़्त एआईएडीएमके की सरकार है. बीजेपी का यहां एक भी विधायक नहीं है. लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन विधायक के अभाव के चलते बीजेपी वहां सत्ता में भागीदार नहीं है.

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