धमतरी: जिले के जंगल हाथियों को आ रहे हैं रास, जमा रखा है डेरा

संक्षेप:

जिले के जंगलों में हाथियों का डेरा

ड्रोन से रखी जा रही है हाथियों पर नज़र

कुछ साल में जिला हाथियों का कॉरिडोर होगा

धमतरी जिले का जंगल किसी को अच्छा लगे या ना लगे, लेकिन ये जंगल हाथियों को बहुत रास आता है... करीब एक महीने पहले ओडिशा के जंगलों से आए 27 हाथियों के दल को जिले का जंगल भा गया है.. जिन पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है। हाथियों का दल नगरी ब्लॉक के जंगल में ही रह रहा है, वहीं दूसरी तरफ चंदा हथिनी पड़ोसी जिले बालोद से 23 हाथियों के साथ लौट आया है।

इस पर वन विभाग के अफसरों के मुताबिक कुछ साल में जिला हाथियों का कॉरीडोर होगा। ऐसे में पहली बार धमतरी में हाथी मित्र दल बनाने तैयारी शुरू की गई है। ये भी धमतरी जिले के जंगल की ओर आ रहा है। अगर ये दल भी जिले के जंगल में प्रवेश करता है, तो पहली बार ऐसा होगा, जब 50 हाथियों का दल धमतरी के जंगल में होगा।

चंदा हथिनी के साथ आए 23 हाथी 6 जिलों में घूम रह है। इनमें महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, कांकेर, बालोद
और राजनांदगांव शामिल हैं। दल बागबाहरा रेंज से 3 जून को धमतरी आया। 26 जुलाई की रात गरियाबंद के फिंगेश्वर रेंज में पहुंचा। 6 सितंबर को फिर धमतरी में घुसा। फिर भानुप्रतापपुर के करही के जंगल से लौट आया। अब दोबारा बालोद से होकर धमतरी की ओर आ रहा है।

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जिले में दो हाथियों के दल हैं। इनमें से किसी भी हाथी में रेडिया कॉलर आईडी नहीं है। ऐसे में हाथियों की निगरानी मल-मूत्र, चिंघाड़ और पैर के पंजों से हो रही है। करीब 8 रेंज के अफसर-कर्मचारी इन हाथियों की निगरानी कर रहे हैं। चंदा हथिनी का दल वर्तमान में नेशनल हाईवे से करीब 15 किमी दूर हैं। जबकि ओडिशा से आए हाथी नगरी बस्ती से 20 किमी अंदर जंगल में है।

इस जंगल मे जाने का कोई सीधा रॉड रास्ता नहीं है... यही कारण है हाथियों को ये जंगल रास आता है.. क्योंकि वो शहरी दुनिया से दूर रहते हैं जहां ज्यादातर शोर शराबा रहता है...इस जंगल में इन हाथियों को मन मुताबिक शांति और आज़ादी मिल रही है...

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