धमतरी: काम पर लौटे रोजगार सहायक, हड़ताल से हजारों मनरेगा मजदूरों को छह लाख मानव दिवस का नुकसान

संक्षेप:

रोजगार सहायकों की हड़ताल से मनरेगा काम था ठप

हजारों मनरेगा मजदूरों को छह लाख मानव दिवस का नुकसान

राज्य शासन के आश्वासन के बाद काम पर लौटे मजदूर

धमतरी जिले में पंचायत सचिव के बाद रोजगार सहायकों की हड़ताल काफी समय से चल रही थी.. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के पंचायत सचिव और रोजगार सहायक 30 दिसंबर से हड़ताल पर थे... धमतरी जिले में 347 रोजगार सहायक ग्राम पंचायतों में कार्यरत हैं। वे अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक जनवरी से बेमुद्दत हड़ताल पर चले गए थे। इस दौरान ग्राम पंचायतों व गांवों में मनरेगा कार्य पूरी तरह से ठप था। केवल ढाई हजार से 3000 मनरेगा मजदूरों को ही काम मिल रहा था।

 

जबकि जनवरी माह में औसतन 20 हजार से 25000 मनरेगा मजदूरों को काम मिलता था। इस तरह हड़ताल के 23 दिनों में जिले के हजारों मनरेगा मजदूरों को छह लाख मानव दिवस का नुकसान उठाना पड़ा है। हड़ताल के दौरान हर रोज 20 हजार मनरेगा मजदूर प्रभावित होते थे।

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हड़ताल के दौरान करीब एक करोड़ 14 लाख रुपये के मनरेगा मजदूरी संबंधी कार्य नहीं हो पाया। क्योंकि मस्टर रोल भरने की पूरी जवाबदारी रोजगार सहायकों की होने की वजह से वे मनरेगा योजना में काम नहीं कर पाते थे। लंबे समय बाद 23 जनवरी से रोजगार सहायक राज्य शासन के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त कर वापस काम पर लौटे हैं।

कोरोना संक्रमण काल के चलते इस साल मनरेगा के बजट में 15 लाख मानव दिवस में वृद्धि हुई है। हर साल 60 लाख मानव दिवस का लक्ष्य धमतरी जिला को मिलता था। पहली बार कोरोना संकट के चलते 75 लाख मानव दिवस का लक्ष्य शासन से मिला है।

इससे मजदूरों को अधिकाधिक रोजगार दिया जा सकता है। यह कार्य फरवरी व मार्च माह में ज्यादा से ज्यादा होंगे। क्योंकि फरवरी व मार्च माह में मजदूरों के पास काम के लाले रहता है। कोई भी कार्य ग्रामीणों के पास नहीं रहता। मजदूर वर्ग के लोग मजदूरी के लिए इस दो माह में पूरी तरह से शहर पर रोजगार के लिए निर्भर रहता है। कई मजदूरों को काम भी नहीं मिल पाता..

रोजगार सहायकों के हड़ताल में चले जाने से शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है, इसे लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त था...

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